Wednesday, November 4, 2026
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Missing Airport Dogs: डेढ़ महीना बीत गया, पुलिस को पता नहीं कुत्ते जिंदा भी हैं या नहीं…IGI एयरपोर्ट मामले के इस केस को पशुप्रेमी जरूर पढ़ें

Missing Airport Dogs: एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रणव जोशी ने दिए अपने आदेश में पुलिस की उदासीनता की कड़ी आलोचना की।

दिल्ली की एक अदालत ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे से दो आवारा कुत्तों के गायब होने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने ‘कद्दू’ (Kaddu) और ‘ब्राउनी’ (Brownie) नामक इन दो कुत्तों का पता लगाने के लिए कोई “गंभीर प्रयास” नहीं किया। यह मामला रश्मि शर्मा नामक पशु कार्यकर्ता की शिकायत पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मार्च और अप्रैल 2026 में IGI एयरपोर्ट से दो सामुदायिक कुत्तों को अवैध रूप से हटा दिया गया था।

पुलिस की जांच पर कोर्ट के कड़े सवाल

  • अदालत ने ‘डीसीपी, आईजीआई एयरपोर्ट’ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया।
  • दिमाग का इस्तेमाल नहीं: “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि डीसीपी ने तथ्यों पर अपना दिमाग नहीं लगाया और घटनाओं की समग्र (Holistic) जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाए।”
  • उदासीन रवैया: कोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच अधिकारी के दृष्टिकोण से ऐसा नहीं लगता कि वह मामले की तह तक जाना चाहते थे।
  • शिकायतकर्ताओं को परेशान करना: कोर्ट ने नोट किया कि पुलिस ने कुत्तों को खोजने के बजाय शिकायतकर्ताओं (Feeders) पर ही ध्यान केंद्रित किया और उन्हें एक विस्तृत प्रश्नावली (Questionnaire) थमा दी।

सीसीटीवी फुटेज और गायब कुत्ते

  • टर्मिनल 3 की घटना: सीसीटीवी फुटेज में एक व्यक्ति (जो एक ठेकेदार से जुड़ा था) एक कुत्ते को लालच देकर गाड़ी में बिठाकर एयरपोर्ट से बाहर ले जाते हुए दिखा।
  • टर्मिनल 1 की घटना: सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो में एक कुत्ते को अमानवीय तरीके से पकड़ते हुए दिखाया गया था।
  • लिंक की अनदेखी: कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया था कि इन दोनों घटनाओं की एक साथ जांच की जाए क्योंकि ये आपस में जुड़ी हो सकती हैं, लेकिन पुलिस ने इन्हें अलग-अलग माना और कोई ठोस जानकारी नहीं जुटा पाई कि कुत्ते कहाँ ले जाए गए।

एक हफ्ते बनाम 15 चक्कर

अदालत ने पुलिस की सुस्ती पर एक दिलचस्प तुलना की। कोर्ट ने कहा कि जो जानकारी अदालत ने केवल एक हफ्ते में जुटा ली, पुलिस उसे तब भी नहीं जुटा पाई जब शिकायतकर्ताओं ने पुलिस अधिकारियों के 15 बार चक्कर लगाए। घटना को डेढ़ महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस को यह भी नहीं पता कि कुत्ते जीवित हैं या नहीं।

कोर्ट का आदेश: नए सिरे से जांच

  • संयुक्त पुलिस आयुक्त (Joint CP) को निर्देश: कोर्ट ने ‘ज्वाइंट कमिश्नर (ट्रांसपोर्ट रेंज)’ को इस मामले की नए सिरे से और व्यापक जांच करने और रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
  • अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई, 2026 को होगी।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
गायब कुत्तों के नामकद्दू और ब्राउनी (IGI एयरपोर्ट के सामुदायिक कुत्ते)।
आरोपठेकेदारों द्वारा कुत्तों का अवैध विस्थापन और अमानवीय व्यवहार।
कोर्ट की टिप्पणीपुलिस का रवैया पशु कल्याण के ‘नेक कार्य’ के प्रति उदासीन है।
निर्देशएयरपोर्ट के सभी टर्मिनलों की घटनाओं को जोड़कर एक एकीकृत जांच की जाए।

पशु अधिकार और पुलिस की जवाबदेही

यह मामला दिखाता है कि कानून की नजर में मूक पशुओं के अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस केवल “खानापूर्ति” (Formality) करके अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती, विशेषकर तब जब सीसीटीवी फुटेज जैसे पुख्ता सबूत मौजूद हों। हवाई अड्डे जैसे सुरक्षित क्षेत्र से किसी जीव का इस तरह गायब होना सुरक्षा और प्रक्रिया—दोनों पर सवाल खड़े करता है।

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