Saturday, September 19, 2026
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Aadhaar Issue: आधार कार्ड में घुसपैठ पर एक्शन लें…SC ने कहा-नियम बदलने का काम संसद का है, कोर्ट का नहीं, पढ़ें PIL पर निर्देश

Aadhaar Issue: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने आधार कार्ड (Aadhaar Card) से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विवरणतथ्य
वर्तमान आधार नामांकनलगभग 144 करोड़ (99% आबादी)।
कोर्ट का रुखनीतिगत बदलाव न्यायपालिका नहीं, विधायिका (संसद) का काम है।
कानूनी सवालक्या आधार अधिनियम 2016 घुसपैठियों को रोकने में विफल रहा है?
अंतिम निर्देशयाचिकाकर्ता अपनी शिकायतें केंद्र सरकार के सामने रखें।

संसद द्वारा कानून में संशोधन की आवश्यकता पर जोर

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका का निपटारा करते हुए इसे सरकार के समक्ष एक अभ्यावेदन (Representation) के रूप में मानने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आधार नियमों में बड़े बदलाव के लिए विधायी हस्तक्षेप (Legislative Intervention) यानी संसद द्वारा कानून में संशोधन की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने आधार प्रणाली में व्याप्त खामियों और घुसपैठियों द्वारा इसके गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, कोर्ट ने माना कि ये नीतिगत और विधायी मामले हैं।

याचिका में क्या मांगें की गई थीं? (Key Reliefs Sought)

  • याचिकाकर्ता ने आधार जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने का सुझाव दिया था।
  • उम्र की सीमा: नए आधार कार्ड केवल 6 वर्ष की आयु तक के बच्चों को ही जारी किए जाएं (क्योंकि लगभग 99% भारतीयों का नामांकन पहले ही हो चुका है)।
  • सख्त गाइडलाइन्स: किशोरों और वयस्कों के लिए आधार जारी करने के नियम अत्यंत कड़े हों ताकि घुसपैठिये भारतीय नागरिक बनकर आधार न बनवा सकें।
  • डिस्प्ले बोर्ड: सभी कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) पर बोर्ड लगाए जाएं कि आधार केवल “पहचान का प्रमाण” (Proof of Identity) है, न कि नागरिकता, पते या जन्मतिथि का प्रमाण।

घुसपैठियों द्वारा दुरुपयोग का मुद्दा (Concerns Over Infiltration)

  • याचिका में ‘संवैधानिक अनुच्छेद 32’ के तहत दलील दी गई थी।
  • आधार एक ‘बुनियादी दस्तावेज’ बन गया है: आधार के जरिए लोग राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और मतदाता पहचान पत्र जैसे अन्य दस्तावेज आसानी से बनवा लेते हैं।
  • कमजोर वेरिफिकेशन: वर्तमान में रेंट एग्रीमेंट जैसे दस्तावेजों के आधार पर कोई भी आधार बनवा सकता है। घुसपैठिये इसी कमजोर सत्यापन प्रक्रिया का फायदा उठाकर खुद को भारतीय नागरिक के रूप में नामांकित कर लेते हैं।
  • संसाधनों का डायवर्जन: गलत तरीके से आधार बनवाकर घुसपैठिये जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, जिससे देश के संसाधनों का नुकसान हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख: पार्लियामेंट तय करे

  • अदालत ने याचिका की मांगों पर सीधा आदेश देने के बजाय इसे सरकार के पाले में डाल दिया।
  • विधायी अधिकार: कोर्ट ने कहा, “इनमें से अधिकांश मांगों के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे में संशोधन और विधायी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।”
  • सुझाव: बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा, “इन मुद्दों को संसद और सरकार के संज्ञान में लाएं। वे इन पर विचार करेंगे और उचित कदम उठाएंगे।”
  • प्रतिनिधित्व (Representation): कोर्ट ने याचिका को खारिज नहीं किया, बल्कि इसे सरकार को सौंपने का निर्देश दिया ताकि वे इसे एक सुझाव के रूप में देखें।

आधार पहचान है, नागरिकता नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। साथ ही, कोर्ट ने यह भी संदेश दिया कि सुरक्षा और सत्यापन की प्रक्रियाओं को आधुनिक और सख्त बनाने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है, क्योंकि इसके लिए ‘आधार अधिनियम’ में बदलाव की जरूरत होगी।

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