Well-Settled wife: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने ‘हिंदू विवाह अधिनियम’ की धारा 24 के तहत दायर एक याचिका पर कड़ी टिप्पणी की।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| विवरण | कोर्ट का निष्कर्ष |
| पक्षकार | पत्नी (स्त्री रोग विशेषज्ञ) और पति (न्यूरोसर्जन)। |
| बच्चों का गुजारा भत्ता | ₹60,000 (बरकरार रखा गया)। |
| पत्नी का गुजारा भत्ता | खारिज (योग्यता और कमाने की क्षमता के आधार पर)। |
| कानूनी सिद्धांत | जानबूझकर बेरोजगार रहने वाले सक्षम व्यक्ति को रखरखाव नहीं। |
डॉक्टर दंपति से जुड़ा है मामला
अदालत ने वैवाहिक विवादों में गुजारा भत्ता (Maintenance) के संबंध में एक महत्वपूर्ण और व्यवहारिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी उच्च शिक्षित और पेशेवर रूप से सक्षम है, लेकिन वह जानबूझकर काम नहीं कर रही है, तो वह पति से अंतरिम गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी। यह मामला एक डॉक्टर दंपति से जुड़ा है, जहाँ पत्नी एक स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) है और पति एक न्यूरोसर्जन (Neurosurgeon) है।
कोर्ट का मुख्य तर्क: ‘अर्हता बनाम आवश्यकता’ (Qualification vs Necessity)
- अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ता उन लोगों के लिए है जो खुद का भरण-पोषण करने में अक्षम हैं, न कि उनके लिए जो सक्षम होने के बावजूद काम नहीं करना चाहते।
- विशेषज्ञता का उपयोग: कोर्ट ने कहा, “जहाँ एक योग्य व्यक्ति अपनी विशेषज्ञता के उपयोग से पर्याप्त से अधिक कमाने में सक्षम है, और फिर भी वह केवल पति पर बोझ डालने के उद्देश्य से ऐसा करने से परहेज करता है, ऐसी स्थिति में अदालतें धारा 24 के तहत रखरखाव से इनकार कर सकती हैं।”
- क्षमता: चूंकि पत्नी एक प्रशिक्षित स्त्री रोग विशेषज्ञ है, इसलिए कोर्ट ने माना कि वह उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में सम्मानजनक कमाई करने की पूरी क्षमता रखती है।
मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- आरोप: पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति द्वारा तलाक का केस दायर करने के बाद अस्पताल ने उसे नौकरी से निकाल दिया था, इसलिए अब वह बेरोजगार है और उसे वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।
- फैमिली कोर्ट का आदेश: निचली अदालत ने बच्चों के लिए ₹60,000 मासिक भरण-पोषण का आदेश दिया था, लेकिन पत्नी की खुद के लिए अंतरिम गुजारा भत्ता की मांग को खारिज कर दिया था। इसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
- पति की दलील: पति ने तर्क दिया कि उसकी पत्नी एक विशेषज्ञ डॉक्टर है और वह उससे भी अधिक कमाने की क्षमता रखती है।
धारा 24 का उद्देश्य (Purpose of Section 24)
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मुकदमेबाजी के दौरान कोई भी पक्षकार (पति या पत्नी) वित्तीय अभाव के कारण न्याय से वंचित न रह जाए। हालांकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रेखांकित किया कि यह प्रावधान आलस्य को बढ़ावा देने या दूसरे पक्ष का शोषण करने के लिए नहीं है। अगर कोई “पेशेवर रूप से योग्य” (Professionaly Qualified) है, तो उसे अपनी योग्यता का उपयोग कर स्वावलंबी बनना चाहिए।
आत्मनिर्भरता की ओर न्यायिक रुख
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला उन पुराने फैसलों से थोड़ा अलग है जहाँ आमतौर पर पत्नी के बेरोजगार होने पर उसे गुजारा भत्ता देना अनिवार्य माना जाता था। कोर्ट अब शिक्षा और पेशेवर योग्यता को एक महत्वपूर्ण पैमाना मान रहा है। यह आदेश उन शिक्षित महिलाओं के लिए एक संदेश है जो अपनी पेशेवर पहचान और योग्यता रखने के बावजूद केवल कानूनी लड़ाई के कारण काम छोड़ देती हैं।

