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Advocate bands: एडवोकेट बैंड की इको-फ्रेंडली डिस्पोजल…सुप्रीम टिप्पणी-क्या हम रूमाल के इस्तेमाल तक मॉनिटर करें

Advocate bands: सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों द्वारा इस्तेमाल किए गए सफेद ‘एडवोकेट बैंड’ के लिए समान और पर्यावरण-अनुकूल डिस्पोजल सिस्टम बनाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी।

पीठ ने कहा, न्यायिक दायरा कहां तक बढ़ाएं?

एडवोकेट बैंड—कॉटन से बना सफेद नेकबैंड—वकीलों द्वारा टाई की जगह पहना जाता है। पीठ ने कहा, न्यायिक दायरा कहां तक बढ़ाएं? मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल की एसोसिएट प्रोफेसर साक्षी विजय द्वारा दायर PIL को खारिज किया।

याचिकाकर्ता का दावा

उनके घर में कई पुराने बैंड पड़े थे जिन्हें दोबारा उपयोग नहीं किया जा सकता था, और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से नष्ट करने की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत परिसरों के पास, कूड़ादानों में और गड्ढों में अक्सर सिंथेटिक बैंड फेंके हुए मिल जाते हैं, जिन्हें वकील एक बार इस्तेमाल कर छोड़ देते हैं।

CJI की टिप्पणी

बेंच ने पूछा कि न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा कहां तक तय होनी चाहिए। CJI ने कहा, “हमारा अधिकार क्षेत्र कहां खत्म होगा? क्या हम रूमाल के इस्तेमाल तक मॉनिटर करें? या गाँवों के कचरे का नियमन करें? हर जगह writ कैसे जारी करें?” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला PIL के दायरे में न्यायिक हस्तक्षेप लायक नहीं है और याचिका खारिज कर दी।

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