Thursday, September 24, 2026
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CBI ENQUIRY: SC ने CBI को फटकारा…“राजनीतिक लड़ाइयों के लिए मशीनरी क्यों इस्तेमाल करते हैं?”

CBI ENQUIRY: सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सीबीआई को फटकारा और कहा, राजनीतिक लड़ाइयों के लिए मशीनरी क्यों इस्तेमाल करते हैं।

प्रारंभिक जांच (PE) की इजाजत मांगने वाली CBI की याचिका खारिज

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड विधानसभा सचिवालय में नियुक्तियों और प्रमोशनों में कथित गड़बड़ियों की जांच शुरू करने के लिए प्रारंभिक जांच (PE) की इजाजत मांगने वाली CBI की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “आप राजनीतिक लड़ाइयों के लिए यह मशीनरी क्यों इस्तेमाल करते हैं? कई बार कहा है।”

यह कहा कोर्ट ने?

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। CBI ने कोर्ट से प्रारंभिक जांच शुरू करने की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया। पीठ ने याद दिलाया कि 14 नवंबर 2024 को ही सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के 23 सितंबर 2024 के फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें CBI जांच के आदेश दिए गए थे।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

जस्टिस गवई ने CBI से सवाल किया—

“राजनीतिक लड़ाइयों के लिए एजेंसी का इस्तेमाल क्यों करते हैं?”

सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल (झारखंड विधानसभा सचिवालय की ओर से) ने कहा,

“यह चौंकाने वाला है कि जब भी मामला आता है, CBI उससे पहले ही अदालत में मौजूद रहती है।”

ASG एस वी राजू (CBI की ओर से) ने कहा

इस केस में ऐसा नहीं हुआ। इस पर सिब्बल बोले—“सिर्फ यहां नहीं, पश्चिम बंगाल में भी यह कोर्ट कई बार देख चुका है।”

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

हाईकोर्ट ने बिना किसी FIR, बिना किसी संज्ञेय अपराध, और बिना किसी अपराध के सबूत के CBI जांच के आदेश दे दिए। मामला सर्विस जूरिसप्रुडेंस का है, जिसमें कानून और तथ्यों के जटिल सवाल हैं — आपराधिक जांच का आधार ही नहीं बनता। कथित शिकायत सिर्फ अनवेरिफाइड वॉयस रिकॉर्डिंग पर आधारित थी, जिसे किसी ने CD बनाकर स्पीकर को दे दिया था। 2003–2007 के दौरान भर्ती पूरी प्रक्रिया से की गई— विज्ञापन, एडमिट कार्ड, परीक्षा और इंटरव्यू के बाद ही नियुक्तियां हुईं।

2007 में बनी जांच समिति की रिपोर्ट पर भी मतभेद थे।

2014 में गठित ज्यूडिशियल कमीशन ने 2018 में रिपोर्ट सौंपी, पर वह सरकार को आधिकारिक रूप से भेजी ही नहीं गई, जैसा कि कानून में जरूरी है। 2019 में दो अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। 2022 में राज्य सरकार ने जटिल कानूनी सवालों को देखते हुए नई आयोग बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू की।

हाईकोर्ट का आदेश क्यों विवादित बताया गया

याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने यह नहीं देखा कि: मामले में कोई अपराध बनता ही नहीं। राज्य की जांच एजेंसियां अयोग्य होने का कोई कारण नहीं बताया गया। विधानसभा सचिवालय पहले से ही रिपोर्ट और ATR के आधार पर कार्रवाई कर रहा था।

मामला क्या था

यह याचिका झारखंड विधानसभा में सार्वजनिक नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर की गई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया था।

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