AI-drafted PIL: सुप्रीम कोर्ट ने लुधियाना के एक कपड़ा व्यापारी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया।
शीर्ष कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरणों द्वारा लिखे गए जटिल कानूनी शब्दों को समझाने में पूरी तरह विफल रहा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए सख्त लहजे में कहा, “जाओ, लुधियाना में 2-3 और स्वेटर बेचो। जिन लोगों का काम ऐसी याचिकाएं फाइल करना है, वे जुर्माना लगवाकर आपका नुकसान करवा देंगे।
अदालत में क्या हुआ?
मामले की सुनवाई तब दिलचस्प हो गई जब रजनीश सिद्धू नामक होजरी व्यापारी, जो केवल 12वीं पास हैं, ‘पीएम केयर्स फंड’ (PM CARES Fund) से जुड़ी अपनी याचिका पर बहस करने के लिए खड़े हुए। जैसे ही सिद्धू ने लिखित टेक्स्ट से पढ़ना शुरू किया, चीफ जस्टिस को उनके शैक्षिक बैकग्राउंड पर संदेह हुआ।
यह रही जिरह
- अंग्रेजी का टेस्ट: सीजेआई ने चुटकी लेते हुए कहा, “मैं यहीं आपका अंग्रेजी का टेस्ट लूंगा। अगर आप इसमें 30 प्रतिशत अंक भी ले आए, तो मैं मान लूंगा कि यह याचिका आपने ही ड्राफ्ट की है।”
- कानूनी शब्दों पर फंसे: कोर्ट ने जब सिद्धू से याचिका में इस्तेमाल शब्द “Fiduciary Risk of Corporate Donors” का अर्थ पूछा, तो वे निरुत्तर हो गए और अपने नोट्स खंगालने लगे।
- AI का कबूलनामा: पहले तो सिद्धू ने दावा किया कि उन्होंने खुद याचिका लिखी है, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि वकील की फीस न भर पाने के कारण उन्होंने 3-4 एआई टूल्स (AI Tools) की मदद से इसे तैयार किया है।
टाइपिस्ट और जैकेट का किस्सा
सुनवाई के दौरान सिद्धू ने यह भी बताया कि कोर्ट परिसर के एक टाइपिस्ट ने उनकी मदद की थी। उन्होंने कहा, “टाइपिस्ट बहुत मददगार था, मैंने उसे 4 जैकेट उपहार में दी थीं। वह 1,000 रुपये प्रति घंटा मांग रहा था, लेकिन मैंने उसकी ड्राफ्ट की हुई याचिका इस्तेमाल नहीं की।” इस पर अदालत ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में ऐसी ‘तुच्छ’ याचिकाएं दायर की गईं, तो भारी आर्थिक दंड और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
कोर्ट की अन्य टिप्पणियां
सोमवार को भी इसी पीठ ने एक वकील द्वारा दायर पांच बेतुकी याचिकाओं को खारिज किया था। इनमें से एक याचिका में इस बात पर वैज्ञानिक अध्ययन की मांग की गई थी कि क्या प्याज और लहसुन में ‘तामसिक’ (नकारात्मक) ऊर्जा होती है। सीजेआई ने मजाक में पूछा था, “क्या आपने ये याचिकाएं आधी रात को ड्राफ्ट की थीं?

