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Slight doubt: गंदे हाथों (Unclean Hands) के साथ आने वाले वादी को नहीं मिलेगी राहत…आखिर ऐसा क्यों कहा, पढ़ें

Slight doubt: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यदि कोई वादी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो वह किसी भी राहत का हकदार नहीं है।

विशिष्ट अनुपालन (Specific Performance) के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी भाषा में इसे ‘अनक्लीन हैंड्स’ (Unclean Hands) के साथ अदालत आना कहा जाता है, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने एक संपत्ति के ‘बिक्री समझौते’ (Agreement to Sell) से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

मामले की मुख्य बातें

  • तथ्यों को छिपाना: अपीलकर्ता (वादी) ने अदालत से बिक्री समझौते को लागू करने की मांग की थी, लेकिन उसने एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) को छिपा लिया था। यह MoU प्रतिवादी (विपक्ष) और उसके बीच निष्पादित हुआ था।
  • विपक्ष का तर्क: प्रतिवादी ने अदालत को बताया कि यह लेनदेन वास्तव में संपत्ति की बिक्री के लिए नहीं था, बल्कि एक कर्ज (Loan) के बदले सुरक्षा (Security) के तौर पर किया गया था। छिपाया गया MoU इसी सच्चाई को साबित करता था।
  • कोर्ट का निष्कर्ष: पीठ ने माना कि वादी ने अपनी याचिका (Plaint) में कहीं भी इस MoU का जिक्र नहीं किया। अदालत ने कहा कि जब वादी ने खुद समझौते की शर्तों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को छिपाया है, तो उसे राहत नहीं दी जा सकती।

अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा द्वारा लिखे गए फैसले में ‘विशिष्ट अनुपालन’ के मुकदमों में ईमानदारी के महत्व पर जोर दिया गया। कहा, अदालत के मन में थोड़ा सा भी संदेह होने पर कि वादी ने ईमानदारी (Bonafide) से काम नहीं किया है और समझौते से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है, तो विवेकपूर्ण और न्यायसंगत राहत (Equitable relief) देने से इनकार किया जाना चाहिए। अदालत ने आगे कहा कि किसी भी समझौते के पीछे के असली इरादे को समझने के लिए पार्टियों का आचरण (Conduct) सबसे महत्वपूर्ण होता है।

हाई कोर्ट का फैसला बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें वादी को राहत देने से इनकार कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करना पूरी तरह उचित था क्योंकि वादी ने ‘गंदे हाथों’ के साथ अदालत से न्याय की गुहार लगाई थी।

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