AI-POLICY: केरल हाईकोर्ट ने जिला न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स के इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है।
कोर्ट ने यह पॉलिसी 19 जुलाई को जारी की
नई गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि एआई टूल्स का इस्तेमाल किसी भी हालत में फैसले लेने या कानूनी तर्क देने के लिए नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने यह पॉलिसी 19 जुलाई को जारी की है। यह देश में अपनी तरह की पहली पॉलिसी मानी जा रही है। इसके तहत जिला न्यायपालिका के जज, उनके स्टाफ और उनके साथ काम कर रहे इंटर्न या लॉ क्लर्क्स पर यह नियम लागू होंगे।
गाइडलाइन में क्या कहा गया है
- एआई टूल्स का इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया जाए, क्योंकि इनका गलत या अंधाधुंध इस्तेमाल निजता के अधिकार का उल्लंघन, डेटा सुरक्षा में खतरा और न्यायिक प्रक्रिया में भरोसे की कमी ला सकता है।
- एआई टूल्स को सिर्फ सहायक टूल के रूप में इस्तेमाल किया जाए और वह भी केवल उन्हीं कार्यों के लिए, जिनकी अनुमति दी गई है।
- किसी भी हालत में एआई टूल्स का इस्तेमाल फैसले, राहत, आदेश या जजमेंट देने के लिए नहीं किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी जज की ही होगी।
- एआई टूल्स के इस्तेमाल से जुड़ी हर गतिविधि का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसमें यह भी दर्ज होगा कि कौन-सा टूल इस्तेमाल हुआ और उसे इंसान ने कैसे वेरिफाई किया।
- एआई टूल्स से निकले नतीजों, खासकर अनुवाद जैसे मामलों में, सावधानीपूर्वक जांच जरूरी होगी।
- क्लाउड आधारित एआई टूल्स के इस्तेमाल से बचा जाए, सिवाय उन टूल्स के जिन्हें कोर्ट ने मंजूरी दी हो।
- एआई से जुड़े नैतिक, कानूनी, तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग लेना जरूरी होगा।
- अगर किसी एआई टूल से निकले नतीजों में कोई गलती या समस्या दिखे तो उसकी रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।
किन टूल्स पर लागू होगी यह पॉलिसी
यह पॉलिसी सभी तरह के एआई टूल्स पर लागू होगी, जिनमें जनरेटिव एआई टूल्स जैसे ChatGPT, Gemini, Copilot और Deepseek शामिल हैं। इसके अलावा वे डेटाबेस भी शामिल हैं जो एआई की मदद से केस लॉ या कानूनों तक पहुंच देते हैं।
कब और कैसे लागू होगी यह पॉलिसी
यह गाइडलाइन एआई टूल्स के किसी भी तरह के इस्तेमाल पर लागू होगी, चाहे वह कोर्ट परिसर में हो या बाहर, और चाहे वह निजी, कोर्ट के या किसी तीसरे पक्ष के डिवाइस पर हो।
सख्त अनुपालन के निर्देश
हाईकोर्ट ने सभी जिला जजों और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों से कहा है कि वे इस पॉलिसी को अपने अधीन सभी न्यायिक अधिकारियों और स्टाफ तक पहुंचाएं और इसके सख्त अनुपालन के लिए जरूरी कदम उठाएं।
- क्यों जरूरी हुई यह पॉलिसी
एआई टूल्स की बढ़ती उपलब्धता और पहुंच को देखते हुए कोर्ट ने यह कदम उठाया है ताकि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता, गोपनीयता और जवाबदेही बनी रहे। - एआई से जुड़े खतरे
कोर्ट ने चेताया है कि एआई का अंधाधुंध इस्तेमाल निजता के उल्लंघन, डेटा लीक और न्यायिक फैसलों में भरोसे की कमी का कारण बन सकता है। - एआई का इस्तेमाल कहां तक सीमित
सिर्फ सहायक कार्यों तक सीमित रहेगा एआई का इस्तेमाल, जैसे दस्तावेजों की जांच, केस लॉ सर्च आदि। - निगरानी और जवाबदेही
हर एआई इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना होगा और इंसानी निगरानी अनिवार्य होगी। - ट्रेनिंग और रिपोर्टिंग
जजों और स्टाफ को एआई से जुड़ी ट्रेनिंग लेनी होगी और किसी भी गड़बड़ी की रिपोर्ट करना जरूरी होगा।

