Alarming Delay: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में 8.8 लाख से ज्यादा लंबित एक्जीक्यूशन पेटिशनों (डिक्री लागू करने वाली याचिकाओं) पर सख्त नाराजगी जताई है।
न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल
कोर्ट ने कहा कि अगर डिक्री के बाद हकदार को सालों इंतजार करना पड़े, तो यह “न्याय की विफलता और न्याय का मजाक” है। जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और पंकज मित्तल की बेंच ने Periyammal बनाम V. Rajamani केस की सुनवाई के दौरान कहा, अगर डिक्री पास होने के बाद भी उसे लागू करने में सालों लगेंगे, तो यह न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल है। यह न्याय नहीं, उसकी विफलता है।
3.38 लाख केस निपटे, लेकिन 8.8 लाख अब भी पेंडिंग
कोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 में दिए गए आदेश के बाद करीब 3.38 लाख याचिकाएं निपटाई गई हैं, लेकिन कुल लंबित संख्या 8,82,578 है, जो “बेहद निराशाजनक” बताई गई। कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट को भी फटकार लगाई कि उसने लंबित मामलों का डेटा ही नहीं दिया। बेंच ने सख्त लहजे में कहा, रजिस्ट्रार जनरल को दो हफ्ते में बताना होगा कि जानकारी क्यों नहीं दी गई।
महाराष्ट्र सबसे पीछे, कर्नाटक को फटकार
- महाराष्ट्र: 3.4 लाख लंबित
- तमिलनाडु: 86,000
- केरल: 83,000
- आंध्र प्रदेश: 68,000
- उत्तर प्रदेश: 27,000
सिस्टम सुधार पर जोर
कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट्स को निर्देश दिया कि वे न केवल जिला अदालतों की निगरानी करें बल्कि डिक्री लागू कराने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाएं।
6 महीने की मोहलत, अप्रैल 2026 तक रिपोर्ट जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने अनुपालन के लिए 6 महीने की नई डेडलाइन तय की है। अब सभी हाईकोर्ट्स को 10 अप्रैल 2026 तक अपडेटेड डेटा जमा करना होगा।

