Criminalise Match fixing: क्रिकेट में मैच फिक्सिंग को अपराध माना जाए या नहीं, इस सवाल पर अब सुप्रीम कोर्ट फैसला करेगा।
सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर कर्नाटक प्रीमियर लीग (KPL) से जुड़े मैच फिक्सिंग मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। यह मामला स्टेट ऑफ कर्नाटक बनाम श्री अबरार काज़ी एंड अदर्स शीर्षक से चल रहा है, जो 2018 और 2019 सीजन की फिक्सिंग से जुड़ा है।
हाईकोर्ट ने कहा था – फिक्सिंग ‘आपराधिक अपराध’ नहीं
कर्नाटक पुलिस ने खिलाड़ियों, टीम मालिक, क्रिकेट अधिकारी और एक बुकी पर धोखाधड़ी (IPC की धारा 420) और आपराधिक साजिश (120B) के तहत केस दर्ज किया था। लेकिन कर्नाटक हाईकोर्ट ने 10 जनवरी 2022 को कहा कि “मैच फिक्सिंग भले ही खेल की मर्यादा का उल्लंघन है, पर यह IPC के तहत अपराध नहीं।” हाईकोर्ट का तर्क था कि धोखाधड़ी तभी मानी जाती है जब किसी को ‘धोखे से संपत्ति या पैसा देने के लिए प्रेरित’ किया जाए। दर्शक टिकट स्वेच्छा से खरीदते हैं, इसलिए यह “डिशॉनेस्ट इंड्यूसमेंट” नहीं कहलाता।
BCCI का तर्क – दर्शकों से किया गया धोखा ही ‘चीटिंग’ है
अब BCCI ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि, “हर मैच में दर्शकों और प्रायोजकों से एक स्पष्ट या अप्रत्यक्ष वादा किया जाता है कि खेल निष्पक्ष होगा। अगर खिलाड़ी जानबूझकर मैच फिक्स करता है, तो वह वादा तोड़ता है, यानी धोखा देता है।” बोर्ड ने कहा कि यह धारा 420 के सभी तत्वों को पूरा करता है—दर्शकों और प्रायोजकों को झूठे भरोसे में रखकर पैसे खर्च करवाना ही “चीटिंग” है।
सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, केंद्र से मांगी रिपोर्ट
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्य बागची की बेंच ने BCCI को हस्तक्षेप की अनुमति देते हुए 4 हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही केंद्र सरकार से भी पूछा कि क्या भारत में मैच फिक्सिंग को अपराध घोषित करने पर विचार हो रहा है। अमाइकस क्यूरी अधिवक्ता शिवम सिंह ने बताया कि केंद्र ने पिछली समयसीमा के बावजूद अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।
भारत में अब तक नहीं है फिक्सिंग पर विशेष कानून
भारत में मैच फिक्सिंग या स्पोर्ट्स फ्रॉड को सीधे अपराध घोषित करने वाला कोई केंद्रीय कानून नहीं है। कानून आयोग ने 2018 की अपनी 276वीं रिपोर्ट में इसकी सिफारिश की थी, लेकिन संसद में अब तक इस पर कानून नहीं बना।
विदेशों में फिक्सिंग पर सख्त कानून
- ब्रिटेन: Gambling Act, 2005 में किसी खेल के परिणाम को धोखे से प्रभावित करना अपराध है।
- ऑस्ट्रेलिया: कई राज्यों में खेल परिणाम से जुड़ी भ्रष्ट गतिविधियां दंडनीय हैं।
- दक्षिण अफ्रीका: Prevention and Combating of Corrupt Activities Act, 2004 के तहत खेलों में भ्रष्टाचार को अपराध माना गया है।
“अगर दर्शकों को पता हो कि मैच पहले से फिक्स है, तो कोई टिकट नहीं खरीदेगा”
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि “फिक्सिंग से लोगों को धोखा महसूस होता है, पर यह अपराध नहीं।” अब BCCI और राज्य सरकार का कहना है कि यह धारणा गलत है—क्योंकि दर्शक निष्पक्ष खेल की उम्मीद में पैसा खर्च करते हैं। अगर उन्हें पता हो कि परिणाम पहले तय है, तो वे टिकट ही न खरीदें, और यही ‘डिशॉनेस्ट इंड्यूसमेंट’ है।

