Bombay HC: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा है कि गड्ढों से मौत पर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन क्यों न भरें मुआवजा।
निगम और अफसर जिम्मेदार ठहराए जाएं
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से यह भाी पूछा है कि क्या वह ऐसी पॉलिसी बनाएगी जिसमें गड्ढों से हुई दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों को मुआवज़ा देने की जिम्मेदारी नगर निगमों और अधिकारियों पर तय की जाए। कोर्ट ने साफ कहा, गड्ढों से चोट और मौत पर निगम और अफसर जिम्मेदार ठहराए जाएं। उनके वेतन से रिकवरी की जाए। छोटी-सी पेनल्टी नहीं, उन्हें चुभे ऐसा होना चाहिए। जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस संदीश बी. पाटिल की बेंच ने सरकारी वकील ओएस चंदूरकर से पूछा कि क्या राज्य ऐसी पॉलिसी लाने को तैयार है।
BMC का दावा: इस साल अब तक 27,334 शिकायतें, 688 गड्ढे बाकी
बीएमसी की ओर से वकील अनिल साखरे ने बताया कि, इस साल अब तक 27,334 शिकायतें मिलीं। 15,526 गड्ढों की शिकायतें नागरिकों से आईं, जबकि इंजीनियरों ने 11,808 गड्ढे खुद चिन्हित किए। 2024 में कुल 22,841 गड्ढे मिले। 2023 में 59,533 शिकायतें आई थीं। इस समय 688 गड्ढे बाकी हैं, जिन्हें 48 घंटे में भर दिया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि आंकड़े जनता की हकीकत से मेल नहीं खाते। कुछ सड़कें बेहद अच्छी हैं जैसे मरीन ड्राइव, लेकिन उपनगरों में हालात क्यों खराब हैं? केवल गड्ढे भरने के अलावा आप और क्या कर रहे हैं?
कॉन्ट्रैक्टर पर कार्रवाई का सवाल
कोर्ट ने पूछा कि सड़क बनाने के ठेके किसे दिए जाते हैं और अब तक कितनों पर कार्रवाई हुई। बीएमसी ने कहा कि 1 लाख से 10 लाख तक का जुर्माना लगाया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा, ठेके करोड़ों के और पेनल्टी कुछ लाख की? ये तो peanuts हैं।
एजेंसियों पर नाराजगी
कोर्ट ने अन्य एजेंसियों—MMRDA, PWD, MSRDC, पोर्ट ट्रस्ट, MHADA—की सुनवाई भी की। सभी ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा। इस पर बेंच ने सख्त रुख अपनाया कि आप सब एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। बड़ा सवाल ये है कि अगर गड्ढे से किसी की जान जाती है तो जिम्मेदार कौन होगा? जवाबदेही तय होनी चाहिए।

