Tuesday, August 4, 2026
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Digital Arrest: कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ब्लैकमेलर की तरह हैं…अफसोस है कि यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता

Digital Arrest: सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया के अनियंत्रित इस्तेमाल और उससे जुड़ी चुनौतियों पर तीखी टिप्पणी की।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता की इस बात से सहमति जताई कि कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ब्लैकमेलर्स’ की तरह काम कर रहे हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे फिलहाल राज्यों द्वारा बनाई जा रही गाइडलाइन्स का इंतजार करें। साथ ही, याचिकाकर्ता को अपनी याचिका में सुधार (Amend) करने की आजादी भी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में ऑनलाइन मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स के लिए कड़े रेगुलेशन (नियम) आ सकते हैं।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ? (Key Highlights)

  • यह चर्चा एक ऐसी याचिका पर हो रही थी जिसमें मांग की गई है कि पुलिस द्वारा आरोपियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने को रेगुलेट किया जाए।
  • SG तुषार मेहता का तर्क: उन्होंने कहा कि मुख्यधारा का मीडिया (Mainstream Media) तो जिम्मेदार है, लेकिन सोशल मीडिया का हाल बुरा है। “आज हर कोई जिसके पास मोबाइल है, वो मीडिया है। कुछ वर्चुअल प्लेटफॉर्म तो सिर्फ ब्लैकमेलिंग के लिए ही बने हैं।”
  • CJI सूर्यकांत की टिप्पणी: उन्होंने इसे “डिजिटल अरेस्ट” का एक रूप बताया और अफसोस जताते हुए कहा कि दुर्भाग्य से अभी यह (इस तरह की ब्लैकमेलिंग) स्पष्ट रूप से ‘अपराध’ (Offence) की श्रेणी में नहीं आता।
  • जस्टिस बागची का नजरिया: उन्होंने “एटोमाइज्ड सोशल मीडिया” (Atomised Social Media) को नए युग की एक बड़ी चुनौती करार दिया।

आरोपियों की ‘सोशल मीडिया परेड’ पर आपत्ति

  • याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने गंभीर मुद्दे उठाए।
  • अपमानजनक तस्वीरें: पुलिस अक्सर आरोपियों को हथकड़ी में, रस्सी से बंधे हुए या पीटते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करती है, जो बेहद अपमानजनक है।
  • सोशल मीडिया ट्रायल: ऐसी तस्वीरों से जनता के मन में आरोपी के खिलाफ पहले ही एक धारणा (Bias) बन जाती है, जिससे निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होती है।

कोर्ट का अब तक का रुख

  • गाइडलाइन्स का निर्देश: कोर्ट ने हाल ही में सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि वे पुलिस की ‘मीडिया ब्रीफिंग’ को लेकर सख्त गाइडलाइन्स तैयार करें।
  • NCERT विवाद: हाल ही में NCERT टेक्स्टबुक मामले में कोर्ट के आदेश के बाद गलत सामग्री पोस्ट करने वाले वेबसाइटों और सोशल मीडिया यूजर्स की पहचान करने का निर्देश केंद्र को दिया गया था।
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