Breakdown of marriage: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक दंपती को तलाक दे दिया।
पति की अपील पर सुनाया फैसला
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच रिश्ता पूरी तरह टूट चुका है और अब साथ रहना किसी के हित में नहीं है। कोर्ट ने यह फैसला पति की अपील पर सुनाया, जिसमें उसने हाईकोर्ट के तलाक से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी थी। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि यह फैसला पति-पत्नी और उनके नाबालिग बच्चे के स्वतंत्र और शांतिपूर्ण जीवन के लिए जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि शादी का रिश्ता सम्मान, आपसी विश्वास और साथ निभाने की भावना पर टिका होता है। जब ये बातें खत्म हो जाती हैं, तो सिर्फ कानूनी रूप से साथ रहने का कोई फायदा नहीं होता।
अनुच्छेद 142 के तहत तलाक की डिक्री दी
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए दोनों को तलाक की डिक्री दी। साथ ही पति को पत्नी और बच्चे के लिए हर महीने 15 हजार रुपए भरण-पोषण देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में शादी को जारी रखना सिर्फ झगड़े और मुकदमों को बढ़ाएगा, जो वैवाहिक जीवन की भावना के खिलाफ है। रिकॉर्ड में यह भी आया कि महिला ने पति और उसके परिवार पर क्रूरता का केस किया था, जिसमें सभी बरी हो गए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे हालात में पति से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह उस महिला के साथ रिश्ता बनाए रखे, जिसने उस पर झूठा केस किया।
फैमिली कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी थी
पति ने फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक की अर्जी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी उसकी बीमार मां को प्रताड़ित करती थी और उनकी संपत्ति हड़पना चाहती थी। हालांकि महिला ने इन आरोपों से इनकार किया। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि दोनों ने अपनी जवानी के 15 साल सिर्फ झगड़ों और मुकदमों में बर्बाद कर दिए।

