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BUSTARD Case: संकटग्रस्त पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण…850 वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त क्षेत्र होगा शामिल

BUSTARD Case: गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण के लिए राजस्थान में 850 वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त क्षेत्र को प्राथमिकता वाले क्षेत्र में शामिल करने की सिफारिश की गई है।

GIB मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात में पाए जाते हैं

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी देते हुए कहा, GIB मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात में पाए जाते हैं। इनकी संख्या में तेजी से गिरावट का मुख्य कारण इनके आवास के पास से गुजरने वाली ओवरहेड पावर ट्रांसमिशन लाइनें हैं, जिनमें सोलर प्लांट्स की लाइनें भी शामिल हैं। इन पक्षियों की आंखें सिर के किनारे होती हैं, जिससे इन्हें उड़ान के दौरान सामने आने वाली बिजली की तारों से बचना मुश्किल होता है। मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इन पक्षियों की सुरक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई थी। इसका उद्देश्य राजस्थान और गुजरात में GIB के प्राथमिक और संभावित आवास क्षेत्रों में बिजली की लाइनें भूमिगत करने के लिए सुझाव देना था।

13,000 वर्ग किमी क्षेत्र को प्राथमिकता में बनाए रखने की सिफारिश

गुरुवार को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और एएस चंदुरकर की बेंच के सामने यह मामला सुनवाई में आया। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि पहले करीब 99,000 वर्ग किमी क्षेत्र को GIB संरक्षण के लिए चिन्हित किया गया था, जहां रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स नहीं लगाए जा सकते थे। भाटी ने बताया कि मार्च 2024 के फैसले के अनुसार, समिति ने राजस्थान और गुजरात के लिए दो रिपोर्ट सौंपी हैं। समिति ने सुझाव दिया है कि राजस्थान में पहले से चिन्हित 13,000 वर्ग किमी क्षेत्र को प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में बरकरार रखा जाए। इसके अलावा 850 वर्ग किमी अतिरिक्त क्षेत्र को भी प्राथमिकता क्षेत्र में जोड़ा जाए।

राजस्थान और गुजरात में प्राथमिक और संभावित क्षेत्र

राजस्थान में:

  • प्राथमिक क्षेत्र: 13,163 वर्ग किमी
  • संभावित क्षेत्र: 78,580 वर्ग किमी
  • अतिरिक्त महत्वपूर्ण क्षेत्र: 5,977 वर्ग किमी

गुजरात में:

  • प्राथमिक क्षेत्र: 500 वर्ग किमी
  • संभावित क्षेत्र: 2,100 वर्ग किमी
  • अतिरिक्त महत्वपूर्ण क्षेत्र: 677 वर्ग किमी

पावर कॉरिडोर का सुझाव, ताकि तारें एक जगह रहें

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि एक उच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र है, जहां प्रजनन हो रहा है, उसे भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समिति ने एक अच्छा सुझाव दिया है कि बिजली की सभी लाइनें एक पावर कॉरिडोर में लाई जाएं, ताकि वे इधर-उधर न फैली हों और पक्षियों के लिए खतरा न बनें।

सुनवाई की अगली तारीख 16 सितंबर तय

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को तय की है। मार्च 2024 के फैसले में कोर्ट ने कहा था कि अप्रैल 2019 के आदेश में बदलाव की जरूरत है और सभी पावर लाइनों को भूमिगत करने का blanket आदेश विशेषज्ञों की राय के अनुसार संशोधित किया जाना चाहिए। यह मामला रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एमके रंजीतसिंह और अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया था कि GIB विलुप्ति के कगार पर हैं और सुप्रीम कोर्ट के 2021 के आदेशों का पालन नहीं हुआ है। 2021 में कोर्ट ने राजस्थान और गुजरात सरकारों को निर्देश दिए थे कि जहां संभव हो, वहां ओवरहेड बिजली की तारों को भूमिगत किया जाए और प्राथमिक क्षेत्रों में बर्ड डाइवर्टर लगाए जाएं।

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