Child’s Right: ओडिशा हाईकोर्ट ने दो साल के बच्चे के पिता और दादा-दादी को उससे मिलने का अधिकार दिया।
कटक फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द किया
कोर्ट ने कटक फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुलाकात की याचिका खारिज कर दी गई थी। जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की एकल पीठ ने कहा कि बच्चे के विकास के लिए दादा-दादी और पोते के बीच भावनात्मक रिश्ता जरूरी है। भारतीय समाज में दादा-दादी बच्चों के पालन-पोषण का अहम हिस्सा होते हैं। उनका स्नेह और योगदान नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
तीन हफ्ते के बच्चे को लेकर मायके चली गई थी मां
मामले में याचिकाकर्ता की शादी अप्रैल 2021 में हुई थी। 2023 में बेटा हुआ। जनवरी 2024 में पत्नी तीन हफ्ते के बच्चे को लेकर मायके चली गई। इसके बाद उसने पति और ससुर पर हत्या की कोशिश, छेड़छाड़, क्रूरता और दहेज प्रताड़ना के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई। पिता ने बेटे से मिलने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत फैमिली कोर्ट में अर्जी दी थी। फैमिली कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि बार-बार मुलाकात से मां और बच्चे को नुकसान हो सकता है।
पिता के साथ-साथ दादा-दादी भी मिल सकते
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के इस फैसले को गलत बताया। कोर्ट ने कहा कि दादा-दादी से बच्चे का स्नेहपूर्ण रिश्ता उसके सामान्य विकास में मदद करता है। पीठ ने कहा कि पिता के साथ-साथ दादा-दादी को भी बच्चे से मिलने का अधिकार मिलना चाहिए। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।

