छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कहा, यदि कोई पत्नी बिना किसी पर्याप्त और न्यायसंगत कारण के अपने पति से अलग रहने का विकल्प चुनती है, तो वह भरण-पोषण (Maintenance) की हकदार नहीं होगी।
यह है मामले की पृष्ठभूमि
- विवाद: एक महिला शादी के मात्र चार दिन बाद ही अपने ससुराल से अलग हो गई थी। उसने पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न (कार और ₹10 लाख की मांग) और शारीरिक व मानसिक शोषण का आरोप लगाया था।
- कानूनी कार्यवाही: महिला ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग की थी।
- फैमिली कोर्ट का फैसला: बिलासपुर की फैमिली कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने पाया कि पति ने ‘दांपत्य अधिकारों की बहाली’ (Restoration of Conjugal Rights) के लिए याचिका दायर की थी, जो दर्शाता है कि वह शादी जारी रखने का इच्छुक था।
हाईकोर्ट का निर्णय और कानूनी तर्क
न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए निम्नलिखित टिप्पणियाँ कीं। पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल वैवाहिक स्थिति (Marital Status) भरण-पोषण के अधिकार का आधार नहीं है, बल्कि व्यक्ति के आचरण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
यह भी दिया तर्क
- पर्याप्त साक्ष्यों का अभाव: कोर्ट ने पाया कि पत्नी द्वारा अलग रहने के लिए दिए गए कारणों (दहेज उत्पीड़न आदि) को साबित करने के लिए कोई पर्याप्त सबूत नहीं थे।
- धारा 125(4) CrPC का हवाला: पीठ ने उल्लेख किया कि CrPC की धारा 125 स्पष्ट रूप से उन मामलों में भरण-पोषण पर रोक लगाती है जहाँ पत्नी बिना किसी पर्याप्त कारण के अलग रहती है।
- पति के प्रयास: चूंकि पति ने कानूनी रूप से उसे वापस लाने के प्रयास किए थे और पत्नी ने बिना किसी उचित कारण के लौटने से इनकार कर दिया, इसलिए वह भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उस सिद्धांत को सुदृढ़ करता है कि भरण-पोषण कानूनों का उद्देश्य परित्याग (Abandonment) और क्रूरता के वास्तविक मामलों की रक्षा करना है। इसे ऐसे मामलों में हथियार के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता जहाँ अलगाव का कोई वैध कानूनी आधार न हो।
महत्वपूर्ण कानूनी शब्द
- Conjugal Rights (दांपत्य अधिकार): पति-पत्नी के एक-दूसरे के साथ रहने और वैवाहिक संबंध निभाने के अधिकार।
- Section 125 CrPC: वह कानून जो पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित है।
- Sufficient Cause (पर्याप्त कारण): कानून की नजर में अलग रहने के लिए ठोस और उचित वजह।

