Sunday, August 16, 2026
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RERA  facilitating defaulting builders: लोगों (घर खरीदारों) के लिए RERA बना था…मगर डिफ़ॉल्टर बिल्डर उठा रहे फायदा

RERA  facilitating defaulting builders: उच्चतम न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सभी राज्य ‘रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण’ (RERA) के गठन पर पुनर्विचार करें।

RERA की कार्यप्रणाली पर हताश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जिन लोगों (घर खरीदारों) के लिए रेरा बनाया गया था, वे “पूरी तरह से निराश, हताश और निराश” हैं। कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया कि यदि इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। अदालत ने कहा कि यह संस्था डिफ़ॉल्टर बिल्डरों को सुविधा देने के अलावा कुछ नहीं कर रही है।

हिमाचल प्रदेश रेरा कार्यालय के स्थानांतरण का मामला

यह टिप्पणियां तब आईं जब अदालत हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी गई थी। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पहले इस स्थानांतरण पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट की रोक को हटाते हुए राज्य सरकार को अपनी पसंद की जगह पर कार्यालय स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे प्रशासनिक और नीतिगत निर्णयों में न्यायपालिका को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।कोर्ट ने आदेश दिया कि चूंकि कार्यालय धर्मशाला जा रहा है, इसलिए अपीलीय शक्तियां भी शिमला के जिला जज से हटाकर धर्मशाला के जिला जज को दी जाएं, ताकि लोगों को अपील के लिए शिमला न भागना पड़े।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां

  1. “पुनर्वास केंद्र” बनी संस्थाएं: जब पीठ को बताया गया कि रेरा में एक सेवानिवृत्त IAS अधिकारी नियुक्त हैं, तो CJI ने कहा, “हर राज्य में यह (RERA) एक पुनर्वास केंद्र (Rehabilitation Centre) बन गया है। इन प्राधिकरणों पर इन्हीं लोगों का कब्जा है। जिन लोगों के लिए यह संस्था बनी थी, उन्हें कोई प्रभावी राहत नहीं मिल रही है।”
  2. विशेषज्ञों की कमी: हिमाचल प्रदेश द्वारा धर्मशाला और पालमपुर के विकास के तर्क पर CJI ने सवाल उठाया। कहा, “रिटायर्ड नौकरशाह को रखने का क्या तर्क है? वह पालमपुर के विकास में कैसे मदद करेगा? आपको ऐसे आर्किटेक्ट की सेवाएं लेनी चाहिए जो पर्यावरण के अनुकूल काम करना जानता हो और उस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति से परिचित हो।”
  3. बिल्डरों का पक्षपोषण: अदालत ने कहा कि रेरा अब केवल डिफ़ॉल्टर बिल्डरों को रास्ता देने का माध्यम बन गया है, जो घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने में विफल रहा है।

यह है मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता (राज्य सरकार) का तर्क था कि शिमला शहर में भीड़भाड़ कम करने (Decongest) के लिए कार्यालय को धर्मशाला ले जाना एक प्रशासनिक निर्णय था। वहीं विरोध कर रहे पक्ष का कहना था कि रेरा के 90% मामले शिमला और उसके आसपास के जिलों (सोलन, सिरमौर) से जुड़े हैं, जबकि धर्मशाला में केवल 20 प्रोजेक्ट्स हैं।

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