Collegium decides: सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने एक महत्वपूर्ण “नीतिगत निर्णय” लिया है।
निर्णय के तहत, जिस न्यायाधीश को किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के रूप में नियुक्त करने का प्रस्ताव होगा, उनका स्थानांतरण रिक्ति होने से कम से कम दो महीने पहले कर दिया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले कोलेजियम ने कहा कि यह कदम न्याय प्रशासन की दक्षता और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य
- कोलेजियम के अनुसार, अग्रिम स्थानांतरण (Advance Transfer) के पीछे दो प्रमुख कारण हैं।
- परिचित होना: ताकि होने वाले मुख्य न्यायाधीश उस हाईकोर्ट के कामकाज और मामलों से अच्छी तरह परिचित हो सकें।
- सुचारू कार्यभार: वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के सेवानिवृत्त होते ही नया मुख्य न्यायाधीश तुरंत और बिना किसी बाधा के पदभार ग्रहण कर सके।
हालिया सिफारिशें और नियुक्तियां
- इस नई नीति के आधार पर कोलेजियम ने अहम सिफारिशें की हैं।
- जस्टिस लिसा गिल: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस लिसा गिल को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने और वहां रिक्ति होने पर उन्हें मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।
- जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी: केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मद्रास हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। वह 5 मार्च, 2026 को पदभार संभालेंगे।
- पटना हाईकोर्ट: कोलेजियम ने पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए 9 वकीलों के नामों को भी मंजूरी दी है।
कोलेजियम प्रणाली क्या है?
कोलेजियम भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की वह प्रणाली है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष न्यायाधीशों का एक समूह निर्णय लेता है। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।

