Saturday, October 31, 2026
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Functioning of tribunals: बोझ और अव्यवस्था बन गए हैं ट्रिब्यूनल…जजमेंट लिखने की हो रही है आउटसोर्सिंग

Functioning of tribunals: देश में ट्रिब्यूनल्स (न्यायाधिकरणों) के कामकाज के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने ट्रिब्यूनल के सदस्यों के कार्यकाल विस्तार और रिक्तियों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणियाँ कीं। शीर्ष अदालत ने कहा, ये संस्थान बिना किसी जवाबदेही के एक “बोझ” (Liability) और “अव्यवस्था” (Mess) बन गए हैं। कोर्ट ने यहाँ तक खुलासा किया कि एक वित्तीय ट्रिब्यूनल के तकनीकी सदस्य (Technical Members) अपना फैसला खुद लिखने के बजाय दूसरों से लिखवा रहे हैं।

CJI की मुख्य और सख्त बातें

  • जवाबदेही का अभाव: CJI ने कहा, “ट्रिब्यूनल सरकार की उपज हैं और वे अब एक सिरदर्द बन गए हैं। वे ‘नो-मैन्स लैंड’ की तरह काम कर रहे हैं, जहाँ किसी की कोई जवाबदेही नहीं है।”
  • जजमेंट की आउटसोर्सिंग: CJI ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा, “मेरे पास पुख्ता जानकारी है कि एक महत्वपूर्ण ट्रिब्यूनल में तकनीकी सदस्य खुद एक भी फैसला नहीं लिख रहे हैं। वे न्यायिक सदस्यों पर दबाव डालते हैं कि फैसला उनके नाम से लिख दिया जाए। यहाँ तक कि फैसले आउटसोर्स किए जा रहे हैं, जो न्यायिक प्रणाली में अनसुना है।”
  • अनुभव की कमी: पीठ ने नाराजगी जताई कि तकनीकी सदस्य पर्यावरण कानून, कंपनी कानून और दिवाला (Insolvency) कानूनों को नहीं समझते, जिससे न्याय की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

रिक्तियों और कार्यकाल पर चिंता

अदालत ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से रिक्त पदों को जल्द भरने के लिए व्यवस्था करने को कहा। कोर्ट इस बात से भी नाराज था कि टीडीसैट (TDSAT) जैसे महत्वपूर्ण निकायों में अध्यक्ष के सेवानिवृत्त होने पर एक तकनीकी सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष बना दिया जाता है।

अदालत का अंतरिम आदेश

  • कार्यकाल विस्तार: रिक्तियों के न भरे जाने के कारण, कोर्ट ने मजबूरी में ट्रिब्यूनल के अध्यक्षों के कार्यकाल को अगले आदेश या वैकल्पिक व्यवस्था होने तक बढ़ाने का निर्देश दिया।
  • नई व्यवस्था की आवश्यकता: CJI ने कहा कि शायद एक पूरी तरह से नए तंत्र की आवश्यकता है क्योंकि वर्तमान व्यवस्था राष्ट्रीय हित में नहीं है।

ट्रिब्यूनल क्या होते हैं?

ट्रिब्यूनल अर्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) संस्थाएं हैं जिन्हें अदालतों का बोझ कम करने और विशिष्ट क्षेत्रों (जैसे कर, पर्यावरण, संचार) में त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए बनाया गया है।

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