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Court News: वर्ष 2008 की दर्दनाक घटना, जब गलती से चली थी गोली…फैसले से हो जाएंगे हैरान

Court News: वर्ष 2008 में एक सुरक्षा गार्ड द्वारा गलती से चलाई गई गोली से मारे गए आईडीबीआई बैंक के चपरासी के परिवार को 22.4 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा मिलेगा।

18 फरवरी 2008 को देव को घातक चोटें आईं…

दिल्ली की अदालत ने सुरक्षा गार्ड, बैंक और सुरक्षा एजेंसी को लापरवाही के लिए समान रूप से जिम्मेदार ठहराया। जिला न्यायाधीश नरेश कुमार लाका मृतक चंदर देव (49) के परिवार द्वारा दायर मुआवजे के मुकदमे की सुनवाई कर रहे थे। परिवार ने दावा किया कि सुरक्षा गार्ड ने लापरवाही से अपनी बंदूक का ट्रिगर दबा दिया, जिससे 18 फरवरी 2008 को देव को घातक चोटें आईं।

संयुक्त रूप से मुआवजे की राशि पीड़ित को प्रदान करेंगे…

24 मार्च को दिए गए आदेश में अदालत ने कहा, यह आरोप लगाया गया है कि यह घटना सुरक्षा गार्ड विनय कुमार की लापरवाही के कारण हुई, जिसे सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एंड सिक्योरिटी सर्विसेज लिमिटेड द्वारा नियुक्त किया गया था। सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एंड सिक्योरिटी सर्विसेज लिमिटेड समय-समय पर उक्त बंदूक की स्थिति की जांच करने में विफल रहा। इसलिए, सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एंड सिक्योरिटी सर्विसेज लिमिटेड, सुरक्षा गार्ड विनय कुमार व आईडीबीआई बैंक संयुक्त रूप से मुआवजे के रूप में 20 लाख रुपये ब्याज सहित वादियों को देने के लिए उत्तरदायी हैं।

अदालत ने गलती से गोली चलने के दावे को किया खारिज

अदालत ने सुरक्षा गार्ड के उस बचाव को खारिज कर दिया जिसमें उसने दावा किया था कि यह लापरवाही नहीं थी और वह अपनी बंदूक से कारतूस निकालने की कोशिश कर रहा था, तभी गलती से गोली चल गई। अदालत ने कहा, विवादित बंदूक अपने आप फायर नहीं कर सकती और यह सुरक्षा गार्ड की लापरवाह के कार्य के कारण हुआ, जिसे केवल दुर्घटना या गलती नहीं कहा जा सकता। इसके अलावा, गार्ड को गनमैन के रूप में नियुक्त किया गया था और इस क्षमता में उसे अपने हथियार और गोला-बारूद को संभालते समय पूरी सावधानी और सतर्कता बरतनी चाहिए थी।

30 दिनों के भीतर मुआवजा देना होगा…

अदालत ने यह भी नोट किया कि विनय कुमार को सुरक्षा एजेंसी द्वारा आईडीबीआई बैंक के लिए गार्ड के रूप में नियुक्त किया गया था। अदालत ने कहा, सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एंड सिक्योरिटी सर्विसेज लिमिटेड व आईडीबीआई बैंक अपनी व्यक्तिगत और संयुक्त लापरवाही के लिए समान रूप से उत्तरदायी हैं। इस कारण सभी प्रतिवादी 33.33 प्रतिशत के अनुपात में वादियों को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी हैं। अदालत ने विभिन्न मदों के तहत मुआवजे की गणना 22.4 लाख रुपये से अधिक की, साथ ही नौ प्रतिशत ब्याज के साथ की और यह भुगतान 30 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया।

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