Cricket bodies election: खेल संघों में नेताओं और गैर-खिलाड़ियों के बढ़ते दखल पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया।
चुनावों में धांधली के आरोपों पर सुनवाई
महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के चुनावों में धांधली के आरोपों पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि क्रिकेट संघों का नेतृत्व उन पूर्व क्रिकेटरों को करना चाहिए जिन्होंने देश के लिए पसीना बहाया है, न कि उन लोगों को जिन्हें खेल की बुनियादी समझ तक नहीं है। अदालत ने MCA में सदस्यों की संख्या में अचानक आए उछाल पर सवाल उठाए। बेंच ने रिकॉर्ड देखते हुए हैरानी जताई कि अचानक वृद्धि: 1986 से 2023 तक एसोसिएशन में केवल 164 सदस्य थे, लेकिन 2023 के बाद अचानक नए सदस्यों की बाढ़ आ गई। यह मामला पूर्व भारतीय क्रिकेटर केदार जाधव की याचिका से शुरू हुआ था, जिन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बंपर ड्रॉ की तरह सदस्य क्यों बनाए?
-CJI का सवाल: चीफ जस्टिस ने तंज कसते हुए पूछा, “क्या 2023 के बाद कोई बंपर ड्रॉ निकला था जो इतने सदस्य बना दिए गए?”
- खिलाड़ियों की अनदेखी: कोर्ट ने कहा कि अगर सदस्यता बढ़ानी ही थी, तो वो सीटें रिटायर्ड अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए आरक्षित होनी चाहिए थीं।
राजनीतिक घमासान और ‘धांधली’ के आरोप
- आरोप: जाधव का आरोप है कि करीब 401 नए सदस्यों को जोड़कर वोटर लिस्ट में हेराफेरी की गई है।
- नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद): याचिका के अनुसार, नए सदस्यों में से कई NCP-SP विधायक रोहित पवार के करीबी रिश्तेदार या बिजनेस पार्टनर हैं।
- हाई कोर्ट का स्टे: बॉम्बे हाई कोर्ट ने इन आरोपों के बाद 6 जनवरी को होने वाले चुनावों पर रोक लगा दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने हटाने से इनकार कर दिया।
“खिलाड़ियों से है खेल, अफसरों से नहीं”
- बेंच ने खेल संघों को आईना दिखाते हुए कहा “क्रिकेट अधिकारियों की वजह से नहीं, बल्कि क्रिकेटरों की वजह से है। हॉकी एसोसिएशन की पहचान खिलाड़ियों से होती है। कम से कम उन्हें इतना सम्मान तो मिलना ही चाहिए।”
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं (MCA और रोहित पवार) को अपनी याचिकाएं वापस लेने और अपनी बात बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने रखने को कहा है। बॉम्बे हाई कोर्ट इस मामले पर बुधवार (4 फरवरी) को सुनवाई करेगा। हाई कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह इस मामले का निपटारा जल्द से जल्द (Expeditiously) करे।

