Delhi Crime: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला वकील द्वारा दायर दुष्कर्म के मामले में आरोपी 51 वर्षीय वकील को सरेंडर करने के लिए दी गई समय सीमा बढ़ा दी है।
एक न्यायिक अधिकारी ने मेडिकल जांच न कराने की दी थी सलाह
पीड़िता के वकील ने अदालत को बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद एक न्यायिक अधिकारी ने उससे मेडिकल जांच नहीं कराने की सलाह दी और समझौते के लिए ₹30 लाख देने की पेशकश की। वकील ने दावा किया कि अधिकारी ने पीड़िता पर बयान नरम करने का दबाव भी बनाया और कहा कि आरोपी आगे और मुआवजा देगा।
पहले आरोपी वकील ने दोस्ती की, फिर हो गई गर्भवती
27 वर्षीय महिला वकील ने अपनी शिकायत में बताया कि वह एक दोस्त के जरिए आरोपी से मिली थी और उसके घर पर पार्टी में शामिल होने गई थी, जहां आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में उसने शादी का वादा किया क्योंकि वह विधुर था। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने भावनात्मक ब्लैकमेलिंग के जरिए उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए रखे और मई में वह गर्भवती हो गई। उसने यह भी दावा किया कि आरोपी की कुछ न्यायिक अधिकारियों से करीबी थी, जिन्होंने एफआईआर दर्ज होने से पहले और बाद में भी उससे संपर्क कर केस को कमजोर करने की कोशिश की।
सुप्रीम कोर्ट में आरोपी वकील ने दायर की जमानत अर्जी, लंबित
7 नवंबर 2025 को जस्टिस अमित महाजन ने आरोपी की जमानत रद्द करते हुए उसे एक हफ्ते के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी किसी भी सूरत में पीड़िता से संपर्क नहीं करेगा, अन्यथा दिल्ली पुलिस उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील ने हाईकोर्ट से सरेंडर की तारीख बढ़ाने की मांग करते हुए बताया कि उन्होंने जमानत रद्द होने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की है।

