Divorce Matter:सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक महिला के सास-ससुर के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
शीर्ष अदालत ने पाया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से ‘अस्पष्ट और सामान्य’ थे। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल ‘झगड़ा करना’ अपने आप में घरेलू क्रूरता या दहेज उत्पीड़न का अपराध नहीं माना जा सकता।
मामले की मुख्य बातें
- आरोप: शिकायतकर्ता महिला ने अपनी एफआईआर (FIR) में पति, सास-ससुर और ननद पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इसमें बीएमडब्ल्यू (BMW) कार और अन्य कीमती सामान की मांग का दावा किया गया था।
- समानता का लाभ (Benefit of Parity): कोर्ट ने नोट किया कि इसी एफआईआर के आधार पर पटना हाई कोर्ट ने ननद के खिलाफ मामला पहले ही रद्द कर दिया था क्योंकि आरोप सामान्य थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब सास-ससुर के खिलाफ भी वही एक जैसे आरोप हैं, तो उन्हें भी वही राहत मिलनी चाहिए।
- विशिष्ट आरोपों का अभाव: कोर्ट ने पाया कि एफआईआर में सास-ससुर द्वारा किसी विशिष्ट तिथि, स्थान या किसी विशेष कृत्य (Overt act) का उल्लेख नहीं किया गया था।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
जस्टिस विक्रम नाथ द्वारा लिखे गए फैसले में हाई कोर्ट की गलती को रेखांकित किया गया। अदालत ने कहा, केवल यह आरोप कि वे ‘झगड़ा करते थे’, आईपीसी की धारा 498A (क्रूरता) या दहेज निषेध अधिनियम के तहत कोई आपराधिक अपराध नहीं बनाता। केवल झगड़े के आधार पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता।
हाई कोर्ट के फैसले में सुधार
इससे पहले, पटना हाई कोर्ट ने ननद को तो राहत दे दी थी लेकिन सास-ससुर के खिलाफ कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत ठहराते हुए कहा कि जब दोनों पक्षों पर एक जैसे (Identical) आरोप हैं, तो हाई कोर्ट को अलग-अलग मानक नहीं अपनाने चाहिए थे।
पति पर चलता रहेगा केस
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी ये टिप्पणियां केवल सास-ससुर (अपीलकर्ताओं) तक सीमित हैं। महिला के पति के खिलाफ मामला कानून के अनुसार जारी रहेगा और उस पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
IN THE SUPREME COURT OF INDIA
VIKRAM NATH, J.
CRIMINAL APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL APPEAL NO…………………………OF 2026
(ARISING OUT OF SLP(CRL.) NO.3075/2024)
DR. SUSHIL KUMAR PURBEY & ANR. VERSUS THE STATE OF BIHAR AND ORS.

