Divorce settlement: दिल्ली की एक अदालत ने एक महिला के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की है।
सेटलमेंट में 10 लाख रुपए मिलने की बात हलफनामा से गायब
महिला पर आरोप है कि उसने तलाक के सेटलमेंट में 10 लाख रुपए मिलने की बात छिपाई और कोर्ट में झूठा हलफनामा दिया। अदालत ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का दुरुपयोग नहीं होने देना चाहिए और ऐसे मामलों पर शुरुआत में ही सख्त कदम उठाना जरूरी है। यह मामला महिला द्वारा दायर की गई एक आपराधिक शिकायत से जुड़ा है। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अनम रईस खान इस केस की सुनवाई कर रहे थे। अदालत ने 25 अप्रैल को यह आदेश दिया, जिसकी कॉपी हाल ही में उपलब्ध हुई है। अदालत ने कहा कि महिला ने खुद माना है कि पति-पत्नी के बीच सभी विवाद पहले ही साउथईस्ट जिले की फैमिली कोर्ट में सुलझा लिए गए थे। 22 नवंबर 2022 को आपसी सहमति से तलाक की पहली प्रक्रिया पूरी हुई थी। इसके बाद महिला को सेटलमेंट की कुल 19 लाख रुपए की रकम में से 10 लाख रुपए मिल चुके थे। अब यह मामला 30 जून को फिर सुना जाएगा।
महिला ने कोर्ट में यह अहम जानकारी छिपाई
अदालत ने कहा कि महिला ने यह जानकारी अपनी मौजूदा याचिका में नहीं दी। जबकि उसका पति बाकी रकम देने को तैयार था। महिला ने यह भी स्वीकार किया कि वह 10 लाख रुपए खर्च कर चुकी है और जानबूझकर तलाक की दूसरी प्रक्रिया के लिए फैमिली कोर्ट में बयान देने नहीं पहुंची।
सेटलमेंट का फायदा उठाया, शर्तें नहीं मानीं
कोर्ट ने कहा कि महिला ने पति से सेटलमेंट का फायदा तो लिया, लेकिन तय शर्तों का पालन नहीं किया। ऐसे में पति ने रकम देने के बावजूद कोई राहत नहीं पाई और महिला ने सेटलमेंट की बात छिपाकर यह केस दायर किया।
कोर्ट ने माना- महिला ने कोर्ट को गुमराह किया
अदालत ने कहा कि महिला ने फैमिली कोर्ट में दिए गए हलफनामे और आदेश का उल्लंघन किया है। साथ ही मौजूदा कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है। यह कोर्ट में झूठा हलफनामा देने और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने जैसा है। ऐसे मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब महिला पर अलग से केस चलेगा
कोर्ट ने महिला के खिलाफ भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 340 और 195(1)(बी) के तहत अलग से कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है। धारा 195(1)(बी) कोर्ट में पेश दस्तावेजों से जुड़ी धोखाधड़ी और न्याय में बाधा डालने से संबंधित है। वहीं, धारा 340 बताती है कि कोर्ट को कब और कैसे ऐसे मामलों की जांच शुरू करनी चाहिए।

