Monday, August 17, 2026
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Yamuna Pollution: हमारा काम नहीं, उनका है…दिल्ली की यमुना में जा रहे जहर पर DJB-DUSIB की खींचतान

Yamuna Pollution: यमुना प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने चल रही सुनवाई ने दिल्ली की सफाई व्यवस्था और प्रशासनिक तालमेल की पोल खोल दी है।

जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली NGT बेंच के सामने एक दशक पुराने मामले (निजामुद्दीन वेस्ट एसोसिएशन द्वारा दायर) की सुनवाई के दौरान दिल्ली की दो प्रमुख एजेंसियों के बीच जवाबदेही को लेकर टकराव सामने आया है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) और दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) के बीच छिड़ी ‘क्षेत्राधिकार की जंग’ (Jurisdictional War) के कारण दिल्ली के 675 स्लम क्लस्टर (झुग्गी बस्तियां) बिना सीवर लाइन के नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

पास द बक: कौन बिछाएगा सीवर लाइन?

  • NGT में दाखिल हलफनामों में दोनों विभागों ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाली है।
  • DUSIB का तर्क: “हमारा काम केवल सड़कें, नालियां और सार्वजनिक शौचालय बनाना है। झुग्गी-झोपड़ी (JJ) क्लस्टर्स में सीवर पाइपलाइन बिछाना हमारा अधिकार क्षेत्र नहीं है, यह दिल्ली जल बोर्ड का काम है।”
  • DJB का तर्क: “हम तब तक सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम नहीं लगा सकते जब तक वहां सीवर नेटवर्क न हो। और यह नेटवर्क तैयार करना DUSIB की जिम्मेदारी है।”

जमीनी हकीकत: आंकड़ों की जुबानी

  • 675 स्लम क्लस्टर: दिल्ली की इन बस्तियों में कोई प्रॉपर सीवर कनेक्टिविटी नहीं है।
  • नाला और ड्रेन: घरों का कचरा और सीवेज सीधे बरसाती नालों (Stormwater Drains) में बह रहा है, जो अंततः यमुना नदी में मिलता है।
  • शौचालय की स्थिति: DUSIB के अनुसार, लगभग 680 सार्वजनिक शौचालयों का कचरा तो सेप्टिक टैंक या मौजूदा लाइनों से जुड़ा है, लेकिन घरों से निकलने वाले गंदगी के निपटान का कोई सिस्टम नहीं है।

यमुना में गिरता 400 लाख लीटर गंदा पानी

  • सुनवाई के दौरान कुछ और चिंताजनक तथ्य सामने आए।
  • अनटैप्ड ड्रेन: महरौली, छतरपुर और साकेट जैसे इलाकों से निकलने वाले दो बड़े नालों से रोजाना 40 मिलियन लीटर (4 करोड़ लीटर) अनुपचारित सीवेज (Untreated Sewage) सीधे बह रहा है।
  • पर्यावरण क्लीयरेंस: DJB का कहना है कि इन नालों को टैप करने का काम ‘इन्वायरमेंट क्लीयरेंस’ न मिलने के कारण अटका हुआ है।
  • MCD की भूमिका: नगर निगम (MCD) भी जांच के घेरे में है। डिफेंस कॉलोनी नाले को सुरक्षित करने के उनके दावों को फोटोग्राफिक सबूतों ने चुनौती दी है, जिसमें नाला कई जगहों पर खुला और खतरनाक दिख रहा है।

NGT का अगला रुख

ट्रिब्यूनल इस बात से नाराज है कि एजेंसियां समन्वय (Coordination) की कमी के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रही हैं। मामला 10 साल से अधिक पुराना है, लेकिन डिफेंस कॉलोनी ड्रेन और बारापुला जैसे नालों के जरिए अभी भी अनुपचारित सीवेज यमुना में मिल रहा है।

निष्कर्ष: गवर्नेंस का फेलियर

यह विवाद केवल सीवर लाइन का नहीं, बल्कि दिल्ली की प्रशासनिक विफलता का है। जब तक एजेंसियां एक मेज पर बैठकर जिम्मेदारी तय नहीं करतीं, तब तक यमुना को प्रदूषण मुक्त करने का सपना केवल कागजों तक सीमित रहेगा।

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