Delhi Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि सिर्फ अखबार की खबर पढ़कर मुकदमा दायर न करें।
जनहित याचिका की खारिज
कोर्ट ने कहा कि याचिका दाखिल करने से पहले पूरी रिसर्च करें और जरूरी तथ्यों की जांच करें। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने यह टिप्पणी उस समय की, जब उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और उनसे जुड़ी संस्थाओं में बाहरी भर्ती एजेंसियों के नियमन की मांग वाली एक जनहित याचिका खारिज की।
भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की थी
याचिका में केनरा बैंक के नियंत्रण वाली कंपनी कैन फिन होम्स लिमिटेड (सीएफएचएल) में भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने सेबी या सीबीआई से जांच कराने की अपील की थी। कोर्ट ने याचिका को ‘अधूरी तैयारी वाली’ बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक पोर्टल की खबर पर आधारित है, जिसमें एक व्हिसल ब्लोअर द्वारा भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत की बात कही गई थी। जांच के बाद कुछ नहीं मिला और मामला बंद हो गया।
अखबार की खबर को सबूत नहीं मान सकते: कोर्ट
कोर्ट ने पूछा कि अखबार की खबर की सबूत के तौर पर क्या वैल्यू है? जब तक किसी खबर की पुष्टि न हो, कोर्ट उस पर संज्ञान नहीं ले सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि अगर उन्हें कोई अपराध नजर आया तो उन्होंने सेबी या रिजर्व बैंक से संपर्क क्यों नहीं किया?
जनहित याचिका को हल्के में न लें
कोर्ट ने कहा कि आजकल एक ट्रेंड बन गया है कि लोग एक-दो खबरें पढ़कर जनहित याचिका दाखिल कर देते हैं और कोर्ट या अन्य पक्षों से सबूत मांगते हैं। कोर्ट ने कहा, आपको खुद होमवर्क करना चाहिए। सिर्फ अखबार पढ़कर पीआईएल न दायर करें। न्यायाधीश ने साफ कहा कि जनहित याचिका कानून को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

