Farewell function: सुप्रीम कोर्ट के CJI भुशन रामकृष्ण गवई ने आख़िरी कार्यदिवस पर मिले सम्मान और भावपूर्ण विदाइयों के बीच कहा कि वह इस संस्था को “पूरी संतुष्टि और पूर्ण तृप्ति” के साथ छोड़ रहे हैं।
40 साल की कानूनी यात्रा पूरी करते हुए उन्होंने खुद को “न्याय का छात्र” बताया
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित विदाई समारोह में CJI गवई ने अपने उन फैसलों का भी जिक्र किया, जिन पर उन्हें अपने ही समुदाय की नाराजगी का सामना करना पड़ा था—खासकर वह निर्णय, जिसमें कहा गया था कि एससी वर्ग के ‘क्रीमी लेयर’ को भी आरक्षण से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “संविधान का विद्यार्थी होने के नाते समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व मेरे लिए हमेशा सर्वोपरि रहे।”
CJI गवई 23 नवंबर (रविवार) 2025 को पद छोड़ देंगे
CJI गवई 23 नवंबर (रविवार) 2025 को पद छोड़ देंगे। उन्होंने हाल के अपने ऐतिहासिक फैसले—2021 के ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स कानून के महत्वपूर्ण प्रावधानों को रद्द करने का बचाव करते हुए कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की बुनियादी संरचना है और ट्रिब्यूनल्स की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया जा सकता।
‘एक साधारण पृष्ठभूमि से सुप्रीम कोर्ट तक—यह सब संविधान ने संभव किया’
अमरावती की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के शीर्ष न्यायिक पद तक पहुंचने की यात्रा को याद करते हुए CJI ने कहा कि वह यह सब अपने माता-पिता और संविधान के मूल्यों के कारण कर पाए। वह भारत के पहले बौद्ध और दूसरे दलित CJI हैं (पहले थे K G बालकृष्णन)। उन्होंने कहा, “40 साल की यह यात्रा बेहद संतोषजनक रही। मैंने अपनी ज़िंदगी में वह उदाहरण रखा कि एक किसान का बेटा और दिल्ली के एक बड़े स्कूल में पढ़ने वाले IAS अधिकारी का बेटा—दोनों को समान प्रतिस्पर्धा मिलनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि उनका लॉ क्लर्क—जो एक वरिष्ठ IAS अधिकारी का पुत्र है—उनकी एक टिप्पणी से इतना प्रभावित हुआ कि उसने कहा कि वह अब एससी वर्ग के लिए मिलने वाले किसी भी लाभ का उपयोग नहीं करेगा।
सुर्या कांत होंगे नए CJI
24 नवंबर को जस्टिस सुर्या कांत CJI का पद संभालेंगे। उन्होंने CJI गवई की प्रशंसा करते हुए कहा, “वह सिर्फ सहकर्मी नहीं, मेरे भाई और भरोसेमंद साथी रहे। उनकी सादगी और ईमानदारी अद्वितीय है।”उन्होंने यह भी मज़ाकिया अंदाज में कहा कि गवई साहब हर दिन किसी न किसी जिद्दी वकील को ‘कॉस्ट लगाने’ की चेतावनी देते थे, लेकिन कभी कॉस्ट लगाई नहीं।
‘आपकी बातों ने मेरी आवाज़ रुंध दी है’
सुबह के औपचारिक विदाई समारोह में अटॉर्नी जनरल और कपिल सिब्बल द्वारा पढ़ी गई कविताओं और भावनात्मक संदेशों ने CJI को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा, “जब मैं इस अदालत से आखिरी बार बाहर जाऊंगा, तो यही संतोष रहेगा कि मैंने देश के लिए जो कुछ भी कर सकता था, वह किया।”
न्यायिक दर्शन और अम्बेडकर से प्रेरणा
CJI गवई ने कहा कि उनका न्यायिक दृष्टिकोण डॉक्टर बी.आर. आंबेडकर और अपने पिता—जो अम्बेडकर के करीबी सहयोगी थे—से प्रभावित रहा। उन्होंने कहा कि अपने फैसलों में उन्होंने मूल अधिकारों और राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े मामलों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह विषय हमेशा उनके दिल के करीब रहा। “इन वर्षों में मैंने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की और साथ ही पर्यावरण व वन्यजीवों को भी संरक्षण देने की कोशिश की।”
‘आप कभी बदले नहीं’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “मैंने आपको पहली बार एक प्यूज़ीन जज के रूप में देखा था। आप इंसान के रूप में तब जैसे थे, वैसे ही अब भी हैं।”इस तरह आखिरी दिन CJI गवई के कद, उनके फैसलों और उनकी व्यक्तिगत सादगी को याद करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भावुक विदाई दी।

