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Gram Nyayalaya Jurisdiction: उत्तर प्रदेश में बड़ी राहत … अब ग्राम न्यायालय को गुजारा भत्ता तय करने का हक हुआ, क्षेत्राधिकार पर भ्रम यूं हुआ दूर

Gram Nyayalaya Jurisdiction:इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्राम न्यायालयों (Village Courts) के अधिकार क्षेत्र को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति साफ की है।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विषयअदालत का निष्कर्ष
विवाद का केंद्रक्या ग्राम न्यायालय गुजारा भत्ते के केस सुन सकता है?
अंतिम निर्णयहाँ, ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 के तहत उसे यह अधिकार प्राप्त है।
कानूनी प्रावधानधारा 125 CrPC और नई धारा 144-147 BNSS।
समय सीमारखरखाव के आदेश को लागू कराने की प्रक्रिया 6 माह में पूरी हो।

केस: दामिनी बनाम पंकज शर्मा

हाईकोर्ट के जस्टिस अब्दुल शाहिद की बेंच ने ‘दामिनी बनाम पंकज शर्मा’ मामले में यह आदेश दिया। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले हाई कोर्ट की ही एक अन्य बेंच ने ग्राम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) पर सवाल उठाए थे। अदालत ने मैनपुरी के करहल स्थित ग्राम न्यायालय के पीठासीन अधिकारी को निर्देश दिया है कि एक महिला के गुजारा भत्ता (Maintenance) से संबंधित ‘एग्जीक्यूशन पिटीशन’ (Execution Petition) का निपटारा 6 महीने के भीतर किया जाए।

क्षेत्राधिकार पर भ्रम और स्पष्टीकरण (Jurisdiction Clarity)

  • पिछला आदेश (नवंबर 2025): जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने आश्चर्य जताया था कि ग्राम न्यायालय ने धारा 125 CrPC के तहत याचिका कैसे स्वीकार की, क्योंकि उनके अनुसार इस कोर्ट के पास इसका अधिकार नहीं था। उन्होंने संबंधित न्यायिक अधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा था।
  • ताजा आदेश (अप्रैल 2026): जस्टिस अब्दुल शाहिद ने कानून की व्याख्या करते हुए साफ किया कि ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 की धारा 12 और 14 के साथ जुड़ी पहली अनुसूची (First Schedule) के पार्ट-II में स्पष्ट रूप से ‘पत्नियों, बच्चों और माता-पिता के रखरखाव’ (Maintenance) से संबंधित मामलों का जिक्र है।

CrPC और BNSS का तालमेल

  • अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राम न्यायालय के पास निम्नलिखित कानूनों के तहत सुनवाई का पूरा हक है।
  • पुराना कानून: CrPC, 1973 के अध्याय IX (धारा 125 से 128)।
  • नया कानून: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS, 2023) के अध्याय X (धारा 144 से 147)।
  • फॅमिली कोर्ट एक्ट, 1984: इसकी धारा 7 भी रखरखाव के मामलों से संबंधित है, लेकिन ग्राम न्यायालय अधिनियम इसे ग्रामीण स्तर पर सुनने की शक्ति देता है।

‘एग्जीक्यूशन’ (Execution) में तेजी लाने का आदेश

  • याचिकाकर्ता दामिनी ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उनके पति से गुजारा भत्ता वसूलने के लिए दाखिल की गई याचिका (Execution Petition) पर करहल का ग्राम न्यायालय तेजी से कार्रवाई करे।
  • तथ्य: ग्राम न्यायालय ने 30 नवंबर, 2024 को दामिनी के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन पति द्वारा पैसे न दिए जाने पर उन्होंने उसे लागू (Execute) कराने के लिए फिर से आवेदन किया था।
  • कोर्ट का निर्देश: हाई कोर्ट ने ‘न्यायाधिकारी’ (Gram Nyayalaya Judge) को आदेश दिया कि BNSS, 2023 की धारा 147 के तहत लंबित इस मामले को कानून के अनुसार 6 महीने के भीतर निपटाया जाए।

ग्रामीण न्याय व्यवस्था को मजबूती

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह स्पष्टीकरण उन हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए राहत की बात है जिन्हें गुजारा भत्ते के लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ग्राम न्यायालय केवल छोटे-मोटे झगड़ों के लिए नहीं हैं, बल्कि उनके पास महिलाओं और बुजुर्गों के वित्तीय अधिकारों (Maintenance) की रक्षा करने की भी पूरी कानूनी शक्ति है।

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