Sunday, August 30, 2026
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Bengaluru Custody Battle: कस्टडी विवाद में बच्ची संग यौन उत्पीड़न का मामला उठा…कहा- बच्ची के साथ हुई गलती की CBI करे जांच

Bengaluru Custody Battle: सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु के एक अलग हो चुके दंपति के बीच चल रहे कस्टडी विवाद में एक बड़ा हस्तक्षेप किया है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने निर्देश दिया है कि मां द्वारा दर्ज कराई गई FIR की जांच अब स्थानीय पुलिस के बजाय CBI करेगी। कोर्ट ने इसे एक “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण कानूनी लड़ाई” करार दिया है जिसमें 11 साल की बच्ची बिना किसी गलती के प्रताड़ित हो रही है। अदालत ने 11 साल की नाबालिग बच्ची के साथ उसके पिता द्वारा कथित यौन उत्पीड़न के मामले की जांच CBI (Central Bureau of Investigation) को सौंप दी है।

कोर्ट के सख्त निर्देश (Key Highlights)

निर्देशविवरण
CBI को आदेशपूरी जांच रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की जाए।
सहयोग की शर्तमाता-पिता दोनों को जांच में पूरा सहयोग करना होगा।
कोई दंडात्मक कार्रवाई नहींफिलहाल CBI किसी भी पक्ष के खिलाफ कोई कठोर या दंडात्मक (Coercive) कदम नहीं उठाएगी।
अगली सुनवाई17 जुलाई, 2026

CBI जांच और विशेष समिति का गठन

  • कोर्ट ने केवल जांच ही नहीं सौंपी, बल्कि इसकी शुचिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश भी दिए।
  • DIG रैंक का नेतृत्व: जांच के लिए एक कमेटी बनेगी जिसका नेतृत्व CBI निदेशक द्वारा नामित DIG स्तर का अधिकारी करेगा।
  • विशेषज्ञों की भागीदारी: इस कमेटी में एक प्रसिद्ध महिला मनोवैज्ञानिक (Woman Psychologist) और एक महिला डॉक्टर भी शामिल होंगी।
  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि जांच सही दिशा में और कानून के अनुसार हो।

केस की पृष्ठभूमि (The Allegations)

  • मार्च 2024: मां ने आरोप लगाया कि उसके तलाकशुदा पति ने उनकी बेटी का यौन शोषण किया है।
  • मेडिकल रिपोर्ट: पीड़ित बच्ची की मेडिकल जांच में कथित तौर पर यौन हमले (Sexual Assault) की पुष्टि के संकेत मिले थे।
  • FIR: जयप्रकाश नगर पुलिस स्टेशन में POCSO एक्ट (धारा 10), जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (धारा 75) और IPC की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

लंबी कानूनी लड़ाई (2018 से अब तक)

  • यह मामला केवल उत्पीड़न का नहीं, बल्कि कस्टडी की एक लंबी जंग का हिस्सा है।
  • 2018-2022: पिता ने कस्टडी के लिए केस जीता। फैमिली कोर्ट ने मां के “अवैध संबंधों” और बच्ची की देखभाल न करने के आरोपों के आधार पर कस्टडी पिता को सौंप दी थी।
  • 2023: कर्नाटक हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा लेकिन मां को मिलने के अधिकार (Visitation Rights) दिए।
  • सुप्रीम कोर्ट का रुख: कोर्ट ने पिछले 2 सालों से इस मामले को सुनते हुए कहा कि वैवाहिक विवाद के चक्कर में एक मासूम बच्ची को “टॉरमेंट” (Torment) किया जा रहा है।

न्याय और बच्ची की सुरक्षा

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दर्शाता है कि जब माता-पिता के आपसी झगड़े में गंभीर आपराधिक आरोप (यौन शोषण जैसे) जुड़ जाते हैं, तो सर्वोच्च अदालत बच्ची की सुरक्षा को कस्टडी के अधिकारों से ऊपर रखती है। CBI जांच और विशेषज्ञों की कमेटी का गठन यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सच सामने आए और बच्ची के मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाए।

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