Human Right’s Report: बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ (Paank) ने अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की शुरुआत बलूचिस्तान के लिए बेहद खौफनाक रही है, जहां मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाओं में भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े
पांक द्वारा संकलित जनवरी 2026 के आंकड़े क्षेत्र की गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं:जबरन गायब (Enforced Disappearances): कुल 82 मामले दर्ज किए गए।न्यायेतर हत्याएं (Extrajudicial Killings): 12 पुष्ट मामले सामने आए हैं।रिहाई और प्रताड़ना: गायब किए गए लोगों में से 44 को छोड़ दिया गया, लेकिन उन्होंने गंभीर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की बात कही है।
कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित?
रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान के अलग-अलग जिलों और कराची (सिंध) में छापेमारी और बिना वारंट के गिरफ्तारियां की गईं। इसके अलावा खुजदार, लसबेला, कराची, डेरा बुगती और नुश्की में भी ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं।
यह है जिलवार आंकड़ा
जिला दर्ज मामले (लापता)
केच (Kech) 26
शाल (Shaal) 16
ग्वादर (Gwadar) 15
खारन (Kharan) 9
पंजगुर (Panjgur) 6
अलिखित कानून बन गया है दमन
पांक ने आरोप लगाया है कि बलूचिस्तान में बिना वारंट गिरफ्तारी, घरों में छापेमारी और अज्ञात स्थानों पर रखकर प्रताड़ित करना अब एक “अलिखित कानून” बन चुका है। संगठन ने मांग की है कि इन घटनाओं की पारदर्शी और स्वतंत्र जांच हो। दोषियों की पहचान कर उन्हें जवाबदेह ठहराया जाए। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
HRCP की चेतावनी
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) के एक हालिया ‘फैक्ट-फाइंडिंग मिशन’ ने भी खुलासा किया है कि जबरन गायब करने की ये घटनाएं जनता में अलगाव (alienation) और राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा दे रही हैं।
तल्ख हकीकत
सबूतों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, पाकिस्तानी अधिकारियों ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि ये दावे ‘राजनीति से प्रेरित’ हैं। सरकार के इस रुख ने पीड़ित परिवारों और राज्य के बीच अविश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है।

