Thursday, October 1, 2026
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Citizenship War: क्या अमेरिका में जन्म लेना ही काफी नहीं?… बर्थराइट सिटीजनशिप आदेश पर सुप्रीम कोर्ट में महासंग्राम

Citizenship War: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में जन्मजात नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर छिड़ी कानूनी जंग न केवल संवैधानिक बहस का विषय है, बल्कि यह हजारों प्रवासी परिवारों के भविष्य से भी जुड़ी है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2025 के कार्यकारी आदेश ने 14वें संशोधन की उस व्याख्या को चुनौती दी है जो दशकों से अमेरिका में जन्म लेने वाले हर बच्चे को नागरिकता देती आई है। सुप्रीम कोर्ट उस कार्यकारी आदेश पर सुनवाई शुरू कर रहा है, जो अवैध रूप से या अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के बच्चों को ‘जन्मजात नागरिकता’ देने से रोकता है।

14वां संशोधन बनाम कार्यकारी आदेश

  • विवाद की जड़ संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) के पहले वाक्य में है।
  • Citizenship Clause: “अमेरिका में जन्मे या प्राकृतिक रूप से नागरिक बने सभी व्यक्ति, जो इसके क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) के अधीन हैं, अमेरिका के नागरिक हैं।”
  • ट्रंप का तर्क: जो लोग अवैध रूप से यहाँ हैं, वे पूरी तरह से अमेरिकी ‘क्षेत्राधिकार’ के अधीन नहीं हैं, इसलिए उनके बच्चों को स्वतः नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए।
  • विरोधियों का तर्क: ‘क्षेत्राधिकार’ का मतलब केवल अमेरिकी कानूनों का पालन करना है। राजनयिकों के बच्चों को छोड़कर, यहाँ जन्मा हर बच्चा अमेरिकी है।

लाखों बच्चे होंगे प्रभावित

  • माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के अनुसार, इस आदेश से हर साल अमेरिका में जन्म लेने वाले 2.5 लाख से अधिक बच्चे प्रभावित हो सकते हैं।
  • केवल अवैध प्रवासी नहीं: यह नियम उन छात्रों (Students) और ग्रीन कार्ड आवेदकों पर भी लागू होगा जो कानूनी रूप से लेकिन ‘अस्थायी’ स्टेटस पर अमेरिका में हैं।
  • एक मां की कहानी: फ्लोरिडा में रहने वाली एक अर्जेंटीना की महिला ने बताया कि उसने अपने बेटे के जन्म से पहले ही उसके पासपोर्ट का अपॉइंटमेंट बुक कर लिया था। उसे डर है कि अगर यह आदेश लागू हुआ, तो उसके बच्चे का भविष्य अधर में लटक जाएगा।

दो कानूनी दिग्गजों की भिड़ंत होगी

  • सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर (सरकार का पक्ष): उन्होंने इस केस को ‘ब्राउन बनाम बोर्ड ऑफ एजुकेशन’ (जिसने नस्लभेद खत्म किया था) जैसा ऐतिहासिक बताया, जो संविधान की “गलतफहमियों” को दूर करेगा।
  • सेसिलिया वांग (ACLU – विरोध का पक्ष): उनका कहना है कि राष्ट्रपति नागरिकता की परिभाषा को “मौलिक रूप से बदलने” की कोशिश कर रहे हैं, जो असंवैधानिक है।

कोर्ट का रुख और पिछला रिकॉर्ड

  • निचली अदालतें: अब तक जिस भी कोर्ट ने इस आदेश पर विचार किया है, उसने इसे अवैध करार देते हुए इस पर रोक लगा दी है।
  • सुप्रीम कोर्ट का गणित: कोर्ट में 6 रूढ़िवादी (Conservative) और 3 उदारवादी (Liberal) जज हैं। हालांकि जस्टिस सोनिया सोटोमेयर ने ट्रंप के तर्क को “असंभव कार्य” बताया है, लेकिन रूढ़िवादी बहुमत ने पहले कुछ अन्य आव्रजन विरोधी प्रयासों को अनुमति दी है।

यह है निष्कर्ष: अमेरिका की पहचान पर सवाल

यह मामला केवल एक कानूनी बारीकी नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की इस पहचान को चुनौती देता है कि वह “प्रवासियों का देश” है। अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के पक्ष में फैसला देता है, तो यह पिछले 150 सालों की अमेरिकी संवैधानिक परंपरा को पूरी तरह पलट देगा।

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