Supreme Court in view
Issue of honorarium: बार काउंसिल चुनाव की निगरानी कर रहे पूर्व जजों को मिलने वाले मानदेय (Honorarium) और यात्रा भत्ते को लेकर सुप्रीम अदालत ने नाराजगी दर्ज की है।
शीर्ष कोर्ट ने मामले में भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा, रिटायर्ड जजों के साथ ऐसा व्यवहार उनकी गरिमा और निष्पक्षता के खिलाफ है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने BCI के वकील से कई कड़े सवाल पूछे हैं।
CJI की तीखी टिप्पणियां: “यह गरिमा का सवाल है”
- सुविधाओं की कमी: कोर्ट ने कहा, “आपने चुनाव फीस इसलिए तय की थी ताकि फंड जुटाया जा सके। अब आप पूर्व जजों से कह रहे हैं कि आप उन्हें मानदेय और यात्रा भत्ता नहीं दे सकते? वे क्या करेंगे? क्या उनके पास अपना निजी विमान है?”
- जेब से खर्च: वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरी ने कोर्ट को बताया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों को अपनी यात्रा और ठहरने का इंतजाम खुद करना पड़ रहा है। उन्हें अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है, जो उनके कद के अनुरूप नहीं है।
- BCI का रुख: जब यह मुद्दा BCI के सामने उठाया गया, तो परिषद ने कथित तौर पर कहा कि प्रस्तावित राशि “बहुत ज्यादा” है और व्यावहारिक नहीं है।
राजस्थान बार चुनाव पर भी घिरी BCI
सुनवाई के दौरान राजस्थान स्टेट बार काउंसिल के चुनावों का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के लिए ‘हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी’ बनाई थी, तो BCI ने राजस्थान के लिए अलग से कमेटी क्यों गठित की? अदालत ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के खिलाफ बताते हुए बुधवार तक इस पर स्पष्टीकरण मांगा है।
सुलह की कोशिश
दोपहर के सत्र में BCI के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा खुद अदालत में पेश हुए। CJI ने उनसे कहा, “कृपया इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करें।” मिश्रा ने आश्वासन दिया कि पूर्व जजों के मानदेय और भत्ते से जुड़ी शिकायतों का समाधान जल्द कर लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पूर्व जजों की समितियां बनाई थीं। अब कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इन जजों को दी जाने वाली सुविधाएं उनके पद और सम्मान के मुताबिक होनी चाहिए।






