J&K Arms Licence Scam: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने गन लाइसेंस घोटाले में आरोपी 8 IAS अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी (Sanction for Prosecution) देने में हो रही देरी पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
जम्मू-कश्मीर में हुए बहुचर्चित गन लाइसेंस घोटाले (Arms Licence Scam) को लेकर चल रही जनहित याचिका (PIL) पर कोर्ट ने केंद्र सरकार के ढुलमुल रवैये पर सख्त नाराजगी जताई है। यह मामला 2012 से 2016 के बीच अवैध रूप से हजारों हथियार लाइसेंस जारी करने से जुड़ा है। यह मामला सार्वजनिक महत्व का है क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक भ्रष्टाचार से जुड़ा है। कोर्ट के इस कड़े रुख से अब केंद्र सरकार पर जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है।
यह है मामले की मुख्य बातें
- सालों से लंबित फैसला: कोर्ट ने नोट किया कि यह PIL 2012 से लंबित है। CBI ने जांच पूरी कर ली है और JKAS अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है, लेकिन IAS अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की फाइल गृह मंत्रालय (MHA) के पास अटकी हुई है।
- गृह मंत्रालय (MHA) की दलील: MHA ने कोर्ट को बताया कि 27 अगस्त 2025 को इस संबंध में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। मंत्रालय ने “व्यापक और विस्तृत विश्लेषण” (Comprehensive Analysis) के लिए 4 महीने का और समय मांगा है।
- कोर्ट की नाराजगी: जब 12 फरवरी 2026 को सुनवाई हुई थी, तब कोर्ट को आश्वासन दिया गया था कि फैसला “निकट भविष्य” में ले लिया जाएगा। लेकिन 26 फरवरी को दोबारा वही “विचारधीन” वाला जवाब मिलने पर कोर्ट ने असंतोष जताया।
अदालत की सख्त टिप्पणी
डिवीजन बेंच ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें यह कहने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि यह याचिका जनहित में है और 2012 से लंबित है, लेकिन इसमें कोई खास प्रगति नहीं हुई है। बार-बार ‘निकट भविष्य’ का आश्वासन देने के बावजूद मामला वहीं का वहीं खड़ा है।”
अगला कदम और समय-सीमा
- 4 हफ्ते का समय: कोर्ट ने मंत्रालय द्वारा मांगे गए 4 महीने के समय को ठुकराते हुए केवल 4 सप्ताह की मोहलत दी है।
- शपथ पत्र (Affidavit): अगली सुनवाई से पहले केंद्र सरकार को एक नया हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि इस मामले में अब तक ठोस प्रगति क्या हुई है।

