Tuesday, September 8, 2026
HomeHigh CourtCommercial Suits: कमर्शियल केस में देरी से भी पेश किए जा सकते...

Commercial Suits: कमर्शियल केस में देरी से भी पेश किए जा सकते हैं दस्तावेज…समय-सीमा ‘पत्थर की लकीर’ नहीं है

Commercial Suits: कलकत्ता हाई कोर्ट ने कमर्शियल मुकदमों (Commercial Suits) में दस्तावेजों को पेश करने की समय-सीमा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है।

कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध रॉय की एकल पीठ ने उषा मार्टिन लिमिटेड बनाम बालूरघाट टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के मामले में यह साफ किया है कि कमर्शियल कोर्ट एक्ट के तहत दस्तावेजों को पेश करने की समय-सीमा ‘पत्थर की लकीर’ नहीं है। यदि पक्षकार के पास देरी का “वाजिब कारण” (Reasonable Cause) है, तो कोर्ट बहस के चरण में भी नए सबूतों की अनुमति दे सकता है। कोर्ट ने कहा है कि प्रक्रियात्मक नियम (Procedural Rules) न्याय के रास्ते में बाधा नहीं बनने चाहिए। यह फैसला उन सभी कमर्शियल मुकदमों के लिए एक मिसाल है जहाँ महत्वपूर्ण दस्तावेज शुरुआती जांच के दौरान नहीं मिल पाते। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यदि दस्तावेज मामले के सही निपटारे के लिए आवश्यक हैं, तो “तकनीकी त्रुटि” न्याय के आड़े नहीं आएगी।

कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  • न्याय सर्वोपरि: आदेश XI नियम 1(5) CPC के तहत अदालतों के पास यह विवेक (Discretion) है कि वे शुरुआती चरण के बाद भी दस्तावेजों की अनुमति दें। प्रक्रियात्मक नियम अनुशासन बनाए रखने के लिए हैं, न कि न्याय का गला घोंटने के लिए।
  • पूर्ण प्रतिबंध नहीं: विधायिका (Legislature) का इरादा यह कभी नहीं था कि एक बार समय बीत जाने पर नए दस्तावेजों पर पूरी तरह पाबंदी (Absolute Bar) लगा दी जाए।
  • अधिकारों का संतुलन: एक वादी (Litigant) का अपना मामला पूरी तरह पेश करने का अधिकार एक “मूल्यवान अधिकार” है, जिसे केवल तकनीकी आधार पर नहीं छीना जा सकता।

यह था मामला

  • यह विवाद जहाजों के डिटेंशन चार्ज (Detention Charges) और शिपमेंट लागत से जुड़ा था।
  • बहस के दौरान सवाल: जब मामला अंतिम बहस (Final Arguments) पर पहुँचा, तब कोर्ट ने कुछ तकनीकी सवाल उठाए।
  • नए दस्तावेजों की जरूरत: उन सवालों का जवाब देने के लिए वादी (उषा मार्टिन) ने कुछ ईमेल, बुकिंग नोट्स और कॉन्ट्रैक्ट पेपर पेश करने की अनुमति मांगी।
  • देरी का कारण: कंपनी ने बताया कि कुछ दस्तावेज उनके राँची प्लांट में थे, कुछ आर्काइव में और कुछ सिंगापुर स्थित उनकी सिस्टर कंसर्न के पास थे, जिन्हें खोजना समय लेने वाला काम था।

अदालत का फैसला और शर्तें

  • कोर्ट ने वादी के स्पष्टीकरण को “तर्कसंगत और उचित” माना और कुछ शर्तों के साथ अनुमति दे दी।
  • जुर्माना (Costs): देरी के लिए वादी को ₹50,000 का जुर्माना ‘कलकत्ता हाई कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी’ में जमा करने का आदेश दिया गया।
  • गवाह की अनुमति: कोर्ट ने नए दस्तावेजों के संबंध में दूसरे गवाह (Second Witness) का हलफनामा दाखिल करने की आजादी दी।
  • विपक्ष का अधिकार: प्रतिवादी (Defendant) को केवल उन नए दस्तावेजों और गवाह से जिरह (Cross-examine) करने का मौका दिया गया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
moderate rain
29 ° C
29 °
29 °
94 %
0kmh
100 %
Mon
29 °
Tue
33 °
Wed
34 °
Thu
34 °
Fri
33 °

Recent Comments