Judge’s Pressure: सुप्रीम कोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा सामने आया, जिसमें कहा गया कि एक सीनियर हाईकोर्ट जज ने एक केस में दबाव बनाया।
लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के न्यायिक सदस्य पर दबाव
दरअसल, चेन्नई स्थित नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनक्लैट) के एक न्यायिक सदस्य से एक कंपनी के पक्ष में फैसला देने का दबाव एक सीनियर हाईकोर्ट जज ने डाला। कोर्ट ने इस गंभीर मामले को सीजेआई को प्रशासनिक स्तर पर देखने के लिए सौंप दिया है। यह दावा वकील प्रशांत भूषण ने नामित सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के समक्ष किया।
वकील प्रशांत भूषण ने रखी दलील
वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि उनके पास जानकारी है कि यह संदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से आया था। इस पर बेंच ने चेन्नई एनक्लैट बेंच में लंबित मामले को दिल्ली स्थित प्रिंसिपल बेंच में ट्रांसफर कर दिया। बेंच ने कहा कि यह मामला सार्वजनिक महत्व का है और इसे सीजेआई प्रशासनिक स्तर पर देखेंगे। कोर्ट ने क्लैट के चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण से अनुरोध किया कि वे इस मामले की सुनवाई खुद करें और जल्द से जल्द फैसला दें।
यह है मामला
- यह याचिका एएस मेटकॉर्म प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने दायर की थी। मामला केएलएसआर इंफ्राटेक लिमिटेड की इनसॉल्वेंसी से जुड़ा है।
- 13 अगस्त 2025 को एनसीएलएटी चेन्नई में सुनवाई के दौरान जस्टिस शरद कुमार शर्मा ने कोर्ट में खुलासा किया कि उन्हें एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी की ओर से एक पक्ष के पक्ष में फैसला देने का संदेश मिला है।
- उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने यह वॉट्सएप मैसेज संबंधित पक्ष को दिखाया और तुरंत खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया।
- याचिकाकर्ता का दावा है कि यह दबाव दूसरे पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए डाला गया था।

