Judge’s Row-8: इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने घोषणा की कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को उनकी मूल अदालत में वापस भेजने के प्रस्ताव के विरोध में 25 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।
लखनऊ में बार एसोसिएशन को भी अनुरोध भेज रहे…
यह घोषणा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा न्यायमूर्ति वर्मा के स्थानांतरण की संस्तुति करने के अपने निर्णय की पुष्टि के बाद की गई, जो दिल्ली में अपने आधिकारिक आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में जांच का सामना कर रहे हैं। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने एजेंसी को बताया, न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के इलाहाबाद उच्च न्यायालय में प्रस्तावित स्थानांतरण के विरोध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के वकील मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। उन्होंने कहा, इस संबंध में लखनऊ में बार एसोसिएशन को भी अनुरोध भेज रहे हैं।
सोमवार को भोजनावकाश के बाद रहे न्यायिक कार्य से अलग
अदालत के भोजनावकाश के दौरान इस आशय का प्रस्ताव पारित करने के बाद, वकीलों ने शेष दिन न्यायिक कार्य से खुद को अलग रखा। शाम को एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए तिवारी ने कहा, एसोसिएशन इस मुद्दे पर अंत तक लड़ेगा। सर्वोच्च न्यायालय के पास न्यायिक शक्तियां हैं, लेकिन हमें जनता का समर्थन प्राप्त है। कहा, जस्टिस यशवंत वर्मा के तबादले के खिलाफ 22 संगठनों ने हमें समर्थन पत्र दिया है। आज सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम की बैठक में तबादले के फैसले पर मुहर लगा दी है। यह (आपातकालीन) बैठक सुप्रीम कोर्ट प्रशासन के तबादले के फैसले के मद्देनजर बुलाई गई थी।
अगले प्रस्ताव तक वकील काम नहीं करेंगे…
एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के वकील सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपना फैसला वापस लेने के बाद ही काम पर लौटेंगे। उन्होंने कहा, आज यह लड़ाई भारत के वकीलों द्वारा लड़ी जा रही है और अगले प्रस्ताव तक वकील काम नहीं करेंगे और हम किसी भी तरह के परिणाम का सामना करने के लिए तैयार हैं। अगर न्यायपालिका को बचाने के लिए हमें अपनी जान भी देनी पड़े तो हम ऐसा करने के लिए तैयार हैं… अगर हमें जेल भी जाना पड़े तो हम उसके लिए भी तैयार हैं।
सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करें: अध्यक्ष
एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा, वकील मंगलवार को सड़कों पर उतरेंगे। एक जज को बचाने के लिए पूरे लोकतंत्र को दांव पर लगाया जा रहा है। हम सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील करते हैं। बार एसोसिएशन ने जस्टिस वर्मा द्वारा दिए गए फैसलों की जांच की भी मांग की। 14 मार्च को आग लगने के बाद जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास से नकदी बरामद की गई थी। इसके बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम और दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को जस्टिस वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लेने सहित कई निर्देश जारी किए।

