Wednesday, October 28, 2026
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Judicial Accountability: जिस दिन फैसला, उसी दिन अपलोड करें…लापरवाही पर सीधे सस्पेंशन, कोई छूट नहीं, जानें इस तल्खी की वजह

Judicial Accountability: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र और गोवा की निचली न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद सख्त प्रशासनिक निर्देश जारी किया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल स्वप्निल सी. खाती द्वारा जारी इस आदेश ने राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों के लिए नए और कड़े मानक तय कर दिए हैं। यह कदम अदालती कार्यवाही को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि न्यायिक आदेशों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने में देरी को “गंभीर कदाचार” (Serious Misconduct) माना जाएगा।

आदेश का मुख्य बिंदु: सेम डे अपलोड

  • अनिवार्यता: महाराष्ट्र और गोवा के सभी न्यायिक अधिकारियों को अब अपने द्वारा पारित हर आदेश और फैसले (Judgments) को उसी दिन केस इंफॉर्मेशन सिस्टम (CIS) सर्वर पर अपलोड करना होगा।
  • कारण बताना होगा: यदि किसी विशेष परिस्थिति में फैसला उसी दिन अपलोड नहीं हो पाता है, तो संबंधित जज को देरी के विशिष्ट कारण और विस्तृत विवरण देने होंगे।

“जीरो टॉलरेंस” नीति और कड़ी कार्रवाई

  • हाई कोर्ट ने इस निर्देश के उल्लंघन को लेकर बहुत सख्त चेतावनी दी है।
  • निष्ठा पर सवाल: आदेशों को समय पर अपलोड न करना एक न्यायिक अधिकारी की ‘निष्ठा’ (Integrity) से जुड़े कदाचार के रूप में देखा जाएगा।
  • सीधा सस्पेंशन: यदि किसी जज द्वारा दी गई जानकारी में कोई विसंगति (Discrepancy) पाई जाती है, तो उन्हें विभागीय जांच (Departmental Enquiry) के बिना सीधे निलंबित (Suspend) किया जा सकता है।
  • निगरानी: अब जजों को हर महीने एक प्रमाण पत्र (Monthly Certificate) देना होगा कि उन्होंने अपने सभी आदेश समय पर अपलोड किए हैं।

कोर्ट फाइलों पर नया नियम

  • अदालत ने जजों के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है।
  • फाइल रिटेंशन: एक बार मामला निपट जाने (Dispose) के बाद, न्यायिक अधिकारी कोई भी कोर्ट फाइल अपने पास नहीं रख सकेंगे। उन्हें फाइलों को तुरंत रिकॉर्ड रूम या संबंधित विभाग में जमा करना होगा।

सर्कुलर के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

निर्देशविवरण
क्षेत्राधिकारमहाराष्ट्र और गोवा की सभी निचली अदालतें।
प्लेटफार्मकेस इंफॉर्मेशन सिस्टम (CIS) सर्वर।
अनुपालनआदेश पारित होने का दिन ही डेडलाइन है।
सजाकदाचार माना जाएगा और बिना जांच सस्पेंशन संभव है।
प्रभावीतत्काल प्रभाव से।

वादियों (Litigants) के लिए बड़ी राहत

अक्सर देखा जाता है कि कोर्ट में जज द्वारा फैसला सुनाए जाने और उसके आधिकारिक तौर पर ऑनलाइन उपलब्ध होने के बीच कई दिनों या हफ्तों का अंतर होता है। बॉम्बे हाई कोर्ट के इस सख्त कदम सेआम जनता और वकीलों को फैसलों की तत्काल कॉपी मिल सकेगी। न्यायिक प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और हेरफेर की गुंजाइश कम होगी। अदालतों की कार्यक्षमता (Efficiency) में सुधार होगा। हाई कोर्ट का यह संदेश स्पष्ट है कि तकनीक के इस दौर में न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि वह डिजिटल रूप से तुरंत दिखना भी चाहिए।

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