
JUDICIAL OFFICER: मध्यप्रदेश की एक महिला न्यायिक अधिकारी ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया।
जज पर गंभीर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे
महिला न्यायिक अधिकारी का यह कदम एक जिला जज को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जज बनाए जाने के विरोध में उठाया है। महिला अधिकारी ने इस जज पर गंभीर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि यह वही व्यक्ति है, जिसके खिलाफ उन्होंने सबूतों के साथ शिकायत की थी, लेकिन न तो कोई जांच हुई, न नोटिस, न सुनवाई और न ही कोई जवाबदेही तय की गई। अब वही व्यक्ति हाईकोर्ट का जज बन गया है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंपा इस्तीफा
महिला अधिकारी ने अपना इस्तीफा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंपा। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि उन्हें अपराधियों या गलत लोगों से नहीं, बल्कि उस न्याय व्यवस्था से धोखा मिला है, जिसकी रक्षा की शपथ उन्होंने ली थी।
इस्तीफे में लिखा-कोई जांच नहीं हुई, कोई नोटिस नहीं भेजा गया
महिला अधिकारी ने अपने इस्तीफे में लिखा, “जिस व्यक्ति पर मैंने नाम लेकर, दस्तावेजों के साथ आरोप लगाए, उसे एक बार भी जवाब देने के लिए नहीं कहा गया। कोई जांच नहीं हुई, कोई नोटिस नहीं भेजा गया, कोई सुनवाई नहीं हुई। अब उसे ‘जस्टिस’ कहा जा रहा है, यह उस शब्द के साथ एक क्रूर मजाक है।” उन्होंने आगे लिखा, “मैं इस संस्था को कोई पदक लेकर नहीं छोड़ रही, बल्कि एक कड़वा सच लेकर जा रही हूं कि न्यायपालिका ने न सिर्फ मुझे, बल्कि खुद को भी धोखा दिया है।”
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही महिला अधिकारी की बर्खास्तगी को गलत बताया था
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 फरवरी को मध्यप्रदेश की दो महिला न्यायिक अधिकारियों की सेवा समाप्त करने के आदेश को रद्द कर दिया था। इनमें से एक वही अधिकारी हैं, जिन्होंने अब इस्तीफा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2023 में हुई इस कार्रवाई को “दंडात्मक और मनमाना” बताया था।
लंबे समय से कर रही थीं उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष
महिला अधिकारी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि उन्होंने वरिष्ठ जिला जज के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष किया। इस दौरान उन्हें लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने आवाज उठाई थी।







