Monday, August 10, 2026
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Arrest Case: बीएनएसएस की धारा 35… समन सिर्फ फिजिकल रूप से ही मान्य होंगे…इलेक्ट्रॉनिक नोटिस से गिरफ्तारी नहीं

Arrest Case: सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि बीएनएसएस की धारा 35 के तहत पुलिस या जांच एजेंसी द्वारा भेजे गए समन को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नहीं भेजा जा सकता।

हरियाणा सरकार की याचिका खारिज

शीर्ष कोर्ट ने हरियाणा सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें जनवरी 2025 में दिए गए आदेश में बदलाव की मांग की गई थी। उस आदेश में कोर्ट ने कहा था कि धारा 41A सीआरपीसी या धारा 35 बीएनएसएस के तहत समन व्हाट्सएप या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नहीं भेजे जा सकते।

धारा 35 के तहत नोटिस की अनदेखी से गिरफ्तारी संभव

कोर्ट ने कहा कि भले ही नई आपराधिक संहिता बीएनएसएस में कुछ मामलों में इलेक्ट्रॉनिक नोटिस की अनुमति है, लेकिन धारा 35 में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसलिए इस धारा के तहत नोटिस सिर्फ फिजिकल रूप से ही भेजा जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 35 के तहत भेजे गए नोटिस की अनदेखी करने पर गिरफ्तारी हो सकती है, इसलिए इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

व्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे: कोर्ट

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एनके सिंह की बेंच ने कहा कि धारा 35 के तहत नोटिस की सेवा इस तरह होनी चाहिए जिससे व्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे। कोर्ट ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 530 में जिन प्रक्रियाओं को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से करने की अनुमति दी गई है, उनमें धारा 35 को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया है।

जांच, पूछताछ और न्यायिक कार्यवाही में फर्क होता है: कोर्ट

कोर्ट ने हरियाणा सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि चूंकि बीएनएसएस की धारा 63, 64 और 71 के तहत कोर्ट द्वारा भेजे गए समन इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे जा सकते हैं, इसलिए पुलिस भी ऐसा कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि जांच, पूछताछ और न्यायिक कार्यवाही में फर्क होता है। कोर्ट द्वारा भेजा गया समन एक न्यायिक कार्य है, जबकि पुलिस द्वारा भेजा गया नोटिस एक कार्यकारी कार्य है। इसलिए दोनों की प्रक्रिया एक जैसी नहीं हो सकती।

यह रही हरियाणा सरकार की दलील

हरियाणा सरकार ने यह भी तर्क दिया कि बीएनएसएस की धारा 93 और 193 के तहत समन या रिपोर्ट की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजी जा सकती है, इसलिए धारा 35 में भी यह अनुमति होनी चाहिए। कोर्ट ने इसे भी खारिज करते हुए कहा कि इन धाराओं के तहत भेजी गई जानकारी का व्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई असर नहीं पड़ता, जबकि धारा 35 के तहत नोटिस की अनदेखी पर गिरफ्तारी हो सकती है।

जबरन प्रावधान जोड़ना गलत

कोर्ट ने कहा कि जब कानून बनाने वाले ने जानबूझकर धारा 35 में इलेक्ट्रॉनिक सेवा का प्रावधान नहीं रखा है, तो उसे जबरन जोड़ना विधायिका की मंशा के खिलाफ होगा। इस मामले में कोर्ट द्वारा नियुक्त वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने भी हरियाणा सरकार की दलीलों का विरोध किया।

Case : Satinder Kumar Antil v. Central Bureau of Investigation | IA NO. 63691 OF 2025 in SLP(Crl). 5191 OF 2021

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