Justice Dipankar Dutta
JUDGES-WORK: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपांकर दत्ता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी और न्यायिक जीवन में संतुलन की जरूरत को लेकर खुलकर बातें रखीं।
68-70 जज मिलकर 90 जजों का काम कर सकते हैं? नहीं कर सकते
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में जस्टिस दत्ता, जो बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं, ने कहा कि हाईकोर्ट में स्वीकृत जजों की संख्या 2013 में 75 से बढ़ाकर 94 की गई थी, लेकिन हकीकत यह है कि 2013 से 2020 के बीच सिर्फ एक बार ही यह आंकड़ा 75 तक पहुंच पाया। उसके बाद फिर कभी यह संख्या 75 भी नहीं छू पाई, 94 तो दूर की बात है। उन्होंने कहा, “क्या आप 68-70 जज मिलकर 90 जजों का काम कर सकते हैं? नहीं कर सकते… और अगर कर रहे हैं तो यह अपने साथ, अपने परिवार और उन सभी के साथ अन्याय है जो आप पर निर्भर हैं।”
बिजली भत्ते को बढ़ाया जाना चाहिए
जस्टिस दत्ता ने जजों को सलाह दी कि वे काम के साथ-साथ अपने निजी जीवन और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। उन्होंने कहा, पेशे और परिवार के बीच समय बांटिए, क्योंकि अगर आपको कुछ हो गया तो एक महीने तक लोग सहानुभूति जताएंगे, उसके बाद कोई आपकी सेवा को याद नहीं रखेगा। इसके साथ ही उन्होंने जजों को मिलने वाली कुछ सरकारी सुविधाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जजों को मिलने वाले 10,000 यूनिट बिजली भत्ते को बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि यह सीमा करीब 40 साल पहले तय हुई थी, जब घरों में एसी, माइक्रोवेव, वॉशिंग मशीन, डिश वॉशर जैसी सुविधाएं नहीं होती थीं। उन्होंने इस सीमा को आज के हिसाब से “अपर्याप्त” बताया और इसके संशोधन की अपील की।
ईंधन भत्ते के नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया
उन्होंने ईंधन भत्ते के नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया। फिलहाल जजों को हर महीने 200 लीटर का ईंधन मिलता है, जो यदि महीने में इस्तेमाल न हो तो वापस चला जाता है। जस्टिस दत्ता ने सालाना 2,400 लीटर की सीमा तय करने का सुझाव दिया, जिससे कोई अतिरिक्त खर्च सरकार पर नहीं आएगा। उन्होंने बताया कि ये दोनों प्रस्ताव पहले अस्वीकार हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने एक बार फिर CJI से अनुरोध किया कि इन पर गंभीरता से विचार किया जाए।







