HomeArticlesJustice Word: “भारत को चाहिए अपना न्याय मॉडल…: CJI बनने से पहले...

Justice Word: “भारत को चाहिए अपना न्याय मॉडल…: CJI बनने से पहले जस्टिस सूर्या कांत का बड़ा ऐलान”—75 साल बाद भी विदेशी फैसलों पर हम निर्भर क्यों

Justice Word: देश के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ लेने जा रहे जस्टिस सूर्या कांत ने कहा, भारत को अपना ‘स्वदेशी न्यायशास्त्र’ विकसित करना चाहिए।

स्वदेशी न्यायशास्त्र पर बल देने की जरूरत

पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा, “75 साल में सुप्रीम कोर्ट की बेंचें हजारों फैसले दे चुकी हैं, सिद्धांत विकसित कर चुकी हैं। फिर भी हमें दूसरे देशों के निर्णय क्यों देखने पड़ते हैं? इसलिए स्वदेशी न्यायशास्त्र पर बल देने की जरूरत है।”उन्होंने यह बात उन्होंने जस्टिस बी. आर. गवई की ओर से पहले कही गई सोच को दोहराते हुए कही।

अनेक देशों के जज होंगे शपथ ग्रहण में शामिल

भावी सीजेआई ने कहा, भारत की न्यायपालिका को दुनिया भर में “बहुत सम्मान” मिलता है और कई देशों की अदालतें भारतीय फैसलों का हवाला देती हैं। विदेशी न्यायपालिकाओं के साथ भारत का संवाद आपसी सम्मान और सकारात्मक विचार-विनिमय पर आधारित है। अब विदेशी कानूनी सिद्धांतों पर निर्भर रहने के बजाय 75 साल बाद भी विदेशी फैसलों पर हम निर्भर क्यों हैं।

केन्या में न्यायिक अकादमी की योजना का जिक्र

जस्टिस कांत ने बताया कि हाल ही में जस्टिस गवई के साथ उनकी केन्या यात्रा के दौरान वहां की सरकार ने न्यायिक अकादमी स्थापित करने की इच्छा जताई थी। कहा, “केन्या में न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए हमारी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय न्यायिक अकादमियों के साथ सहयोग पर बात हुई है।”

टेक्नोलॉजी, लीगल एड और मेडिएशन पर गहरा सहयोग

जस्टिस कांत ने कहा, भारतीय न्यायपालिका तकनीकी सुधार, कानूनी सहायता सेवाओं के विस्तार और मध्यस्थता जैसे वैकल्पिक विवाद निपटान तंत्र पर अन्य देशों के साथ गहरा सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रही है।

17 महीने का कार्यकाल: लंबित मामलों को कम करने पर फोकस

जस्टिस सूर्या कांत ने कहा कि CJI के रूप में अपने 17 महीने के कार्यकाल में उनका शीर्ष फोकस सुप्रीम कोर्ट और निचली अदालतों में लंबित मामलों की संख्या घटाना रहेगा। उन्होंने बताया कि कई 7- और 9- जजों वाली संविधान पीठों की सुनवाई प्राथमिकता से कराई जाएगी। “हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट में हजारों केस इसलिए अटके हैं क्योंकि उनसे जुड़े कानूनी सवाल संविधान पीठ के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।” इसी सिलसिले में उन्होंने हाई कोर्ट्स से डेटा और विश्लेषण भी मांगा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की एक तीन-judge बेंच ने ऐसा फैसला दिया जिससे 500 से ज्यादा मामले एक साथ निपट गए। अब वे यह समीक्षा कर रहे हैं कि इनमें कौन-से बैच पिटीशंस रहे हैं और किनका असर निचली अदालतों और हाई कोर्ट के लंबित मामलों पर पड़ता है।

संविधान पीठ के लंबित मामलों की सुनवाई को मिलेगी प्राथमिकता

CJI बनने के बाद जस्टिस सूर्या कांत के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट के लंबे समय से लंबित संवैधानिक मामलों की सुनवाई तेज होने की उम्मीद है। जस्टिस सूर्या कांत 24 नवंबर 2025 को CJI पद की शपथ लेंगे। वह आर्टिकल 370, बिहार वोटर लिस्ट और पेगासस केस के अहम फैसलों में शामिल रहे हैं।

यह है भावी सीजेआई का प्रोफाइल

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस सूर्या कांत सोमवार को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) हैं। जस्टिस कांत की नियुक्ति 30 अक्टूबर को हुई थी और वे करीब 15 महीने तक इस पद पर रहेंगे। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा, जब वे 65 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे। 1962 में हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे जस्टिस कांत ने छोटे शहर के वकील से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक का सफर तय किया है। 2011 में उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एलएलएम में प्रथम श्रेणी प्रथम स्थान हासिल किया था।

जस्टिस कांत 5 अक्टूबर 2018 को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कई अहम फैसले लिखने वाले जस्टिस कांत 5 अक्टूबर 2018 को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए। सुप्रीम कोर्ट में उनके कार्यकाल में आर्टिकल 370 हटाने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिकता अधिकारों और अन्य कई संवैधानिक मुद्दों पर उनके फैसले चर्चा में रहे हैं। वे हाल ही में आए राष्ट्रपति रेफरेंस वाले मामले में भी शामिल थे, जिसमें राज्य विधानसभा से पारित बिलों पर राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर बड़ी व्याख्या की जा रही है। इस फैसले का राज्यों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

यह है जस्टिस कांत के अहम फैसले

जस्टिस कांत उस बेंच में भी थे जिसने औपनिवेशिक काल के देशद्रोह कानून को फिलहाल रोक दिया था और कहा था कि इसकी समीक्षा तक कोई नई FIR दर्ज न की जाए। बिहार में 65 लाख मतदाताओं को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर किए जाने के मुद्दे पर उन्होंने चुनाव आयोग को पारदर्शिता बरतने के लिए प्रेरित किया और SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने एक महिला सरपंच को गलत तरीके से हटाए जाने के मामले में बहाली का आदेश दिया था और लैंगिक भेदभाव को कड़ी फटकार लगाई थी। वे उस फैसले का भी हिस्सा रहे जिसमें बार एसोसिएशनों, जिसमें SCBA भी शामिल है, में एक-तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया गया।

राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राज्य को फ्री पास नहीं दे सकते…यह थी टिप्पणी

2022 में पीएम मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा चूक मामले की जांच के लिए जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति गठित करने का फैसला भी उनकी बेंच ने किया था। कोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामलों में judicially trained mind जरूरी है। जस्टिस कांत ने रक्षा बलों के लिए वन रैंक-वन पेंशन (OROP) योजना को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था और वे महिला सैन्य अधिकारियों की स्थायी कमीशन की लड़ाई वाली याचिकाओं पर सुनवाई भी कर रहे हैं। वे सात जजों की उस संवैधानिक पीठ का भी हिस्सा थे जिसने 1967 के AMU फैसले को पलट दिया, जिससे विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर नए सिरे से विचार का रास्ता खुल गया। पेगासस जासूसी मामले में भी वे उस बेंच में शामिल थे जिसने साइबर एक्सपर्ट्स की समिति बनाई और स्पष्ट कहा था कि “राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राज्य को फ्री पास नहीं दिया जा सकता।”

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
30 ° C
30 °
30 °
58 %
3.6kmh
65 %
Thu
37 °
Fri
39 °
Sat
39 °
Sun
35 °
Mon
39 °

Recent Comments