Loan Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को एक लोन रिकवरी केस में लापरवाही बरतने पर कड़ी फटकार लगाई है।
केस को दोबारा बहाल करने की इजाजत दे दी
कोर्ट ने कहा कि बैंक ने “बेपरवाही और सुस्ती” दिखाई, जिससे मामला बार-बार टलता रहा और आखिर में खारिज हो गया। हालांकि, कोर्ट ने यह देखते हुए कि मामला पब्लिक मनी से जुड़ा है, केस को दोबारा बहाल करने की इजाजत दे दी, लेकिन ₹25 हजार जुर्माने के साथ। जस्टिस गिरीश कठपालिया की बेंच ने कहा, “यह समझ से परे है कि बैंक के कानून अधिकारी या मैनेजर ने इतने समय तक न तो अदालत में हाजिरी दी और न ही केस की प्रगति पर नजर रखी। यह मामला सार्वजनिक धन से जुड़ा है, और अगर इसे बहाल नहीं किया गया तो नुकसान आम जनता को होगा।”
ट्रायल कोर्ट के 4 और 15 जुलाई 2025 के आदेशों को चुनौती दी थी
कोर्ट के सामने बैंक ने ट्रायल कोर्ट के 4 और 15 जुलाई 2025 के आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें बैंक की ओर से बार-बार गैरहाजिरी और नोटिस सर्व न कर पाने के कारण केस खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि पहली नजर में ट्रायल कोर्ट का फैसला गलत नहीं था, क्योंकि “यह तक नहीं बताया गया कि बैंक का जिम्मेदार अफसर इतने दिनों तक क्या कर रहा था।” कोर्ट ने केस को बहाल करते हुए ₹25 हजार की लागत लगाई और निर्देश दिया कि यह रकम पहले बैंक जमा करे और बाद में जिम्मेदार अफसर की सैलरी से वसूले।
एक आंतरिक जांच करने की आवश्यकता: कोर्ट
जस्टिस कठपालिया ने बैंक को आदेश दिया कि वह एक आंतरिक जांच करे ताकि यह तय हो सके कि यह सिर्फ लापरवाही थी या किसी ने जानबूझकर दूसरी पार्टी की मदद की। बैंक जिम्मेदारी तय करे और जांच करे कि यह साधारण लापरवाही थी या किसी ने जानबूझकर दूसरी ओर को फायदा पहुंचाने की कोशिश की।
IN THE HIGH COURT OF DELHI AT NEW DELHI
CM(M) 2016/2025, CM APPL. 65427/2025 & 65426/2025
UNION BANK OF INDIA …..Petitioner Through: Mr. Rajiv Kumar, Advocate
versus M/S SHABD ENTERPRISES AND ANR …..Respondents

