Local body elections: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को साफ चेतावनी दी कि अगले महीने होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में सीमा नहीं लांघे।
OBC समुदाय के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की गई थी
शीर्ष अदालत ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण का कुल प्रतिशत 50% की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर सीमा पार की गई, तो वह चुनाव प्रक्रिया पर ही रोक लगाने को मजबूर होगा। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव उसी व्यवस्था के अनुसार होंगे, जो 2022 की जे.के. बंथिया आयोग रिपोर्ट से पहले लागू थी। इस रिपोर्ट में OBC समुदाय के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की गई थी, जो अभी कोर्ट में लंबित है।
बेंच ने सख्ती दिखाते हुए कहा
“अगर यह दलील दी गई कि नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है और अदालत को दखल नहीं देना चाहिए, तो हम चुनाव ही रोक देंगे। कोर्ट की शक्तियों की परीक्षा न लें,” “हमने कभी भी संविधान पीठ द्वारा तय 50% की सीमा से अधिक आरक्षण देने की इजाजत नहीं दी। दो-जज बेंच ऐसा कर ही नहीं सकती। बंथिया रिपोर्ट अभी विचाराधीन है, इसलिए पहले वाली स्थिति ही लागू रहेगी।”
70% तक आरक्षण देनेवाले निकायों से संबंधित याचिका पर नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानीय निकायों में आरक्षण का प्रतिशत 70% तक पहुंच गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य की तरफ से कहा कि 17 नवंबर 2025 को नामांकन भरने का अंतिम दिन है और उन्होंने 6 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें चुनाव कराने का रास्ता साफ हुआ था।
जस्टिस बागची ने कहा
“हम स्थिति से पूरी तरह अवगत थे। हमने कहा था प्री-बंथिया स्थिति लागू रहेगी। लेकिन क्या इसका मतलब है कि हर जगह 27% लागू कर दिया जाए? ऐसा हुआ तो यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश से टकरा जाएगा।”

