MacBook for victim: बॉम्बे हाई कोर्ट ने POCSO (पॉक्सो) मामले में पीड़िता को MacBook या लेटेस्ट लैपटॉप देने का अनोखा फैसला दिया है।
अदालत ने कहा, आरोपी द्वारा जुर्माने/लागत के रूप में जमा किए गए ₹1.5 लाख का उपयोग नाबालिग पीड़िता की पढ़ाई के लिए एक MacBook या लेटेस्ट लैपटॉप खरीदने में किया जाए। यह निर्देश जस्टिस अश्विन डी. भोबे ने हाई कोर्ट की रजिस्ट्री को दिया है।
कोर्ट का आदेश और मंशा
- जरूरत के अनुसार खरीद: पीड़िता से सलाह लेकर उसकी पढ़ाई के लिए सबसे उपयुक्त लैपटॉप या मैकबुक खरीदा जाए।
- बची हुई राशि: लैपटॉप खरीदने के बाद जो भी पैसे बचें, उन्हें मुंबई के ‘हाई कोर्ट एम्प्लॉईज मेडिकल वेलफेयर फंड’ में ट्रांसफर कर दिया जाए।
- उद्देश्य: कोर्ट ने माना कि यह राशि पीड़िता के भविष्य और उच्च शिक्षा में मददगार साबित होगी।
मामला क्या था?
- पुणे के एक 52 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज था।
- पारिवारिक विवाद: आरोपी पीड़िता का सगा चाचा/ताया है। कोर्ट को बताया गया कि यह पूरा मामला एक ‘गलतफहमी’ के कारण शुरू हुआ था।
- आपसी समझौता: पीड़िता ने मजिस्ट्रेट और हाई कोर्ट के सामने स्पष्ट किया कि अब उसे अपने चाचा के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है। उसने बिना किसी दबाव के अपनी मर्जी से केस खत्म (Quash) करने के लिए हलफनामा दिया।
- शर्त: हाई कोर्ट ने केस और चार्जशीट रद्द करने के लिए एक शर्त रखी कि आरोपी को कोर्ट में ₹1.5 लाख जमा करने होंगे।
कोर्ट का रुख
जस्टिस भोबे ने पाया कि चूंकि पीड़िता और आरोपी के बीच समझौता हो गया है और वे रिश्तेदार हैं, इसलिए केस को जारी रखने का कोई मतलब नहीं है। कोर्ट ने FIR और चार्जशीट को रद्द कर दिया और आरोपी द्वारा जमा की गई राशि को सीधे सामाजिक और शैक्षिक लाभ के लिए मोड़ दिया।
यह रहा कानूनी प्रतिनिधित्व
आरोपी की ओर से: एडवोकेट शहजाद नकवी और अमरीन सैयद। जबकि पीड़िता की ओर से: एडवोकेट सना सुबेदार व राज्य की ओर से: APP पी.एन. दाभोलकर ने पैरवी की।

