Marry the convict: केरल हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी को शादी के लिए 15 दिन की पैरोल दी है।
यह प्रेम की मिसाल है, जिसे नजरअंदाज नहीं कर सकते
कोर्ट ने यह फैसला उस महिला के साहस और भावनात्मक मजबूती को देखते हुए लिया, जो सजा के बावजूद कैदी से शादी करना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि यह प्रेम की मिसाल है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति पीवी कुन्हिकृष्णन ने कहा, “जब एक महिला यह कहती है कि ‘तुम मेरे आज हो, मेरे कल हो और हमेशा के लिए मेरे हो’, तो कोर्ट उसकी भावना को नजरअंदाज नहीं कर सकता।” कोर्ट ने यह भी कहा कि तकनीकी नियमों के चलते ऐसे मानवीय मामलों में न्याय नहीं रोका जाना चाहिए।
मां ने की थी इमरजेंसी पैरोल की मांग
यह याचिका कैदी की मां ने दायर की थी, जिसमें 13 जुलाई 2025 को होने वाली शादी के लिए बेटे को इमरजेंसी पैरोल देने की मांग की गई थी। जेल प्रशासन ने पहले इस आधार पर पैरोल देने से इनकार कर दिया था कि केरल जेल नियमों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए 12 जुलाई से 26 जुलाई तक पैरोल मंजूर की। कोर्ट ने आदेश की शुरुआत कवयित्री माया एंजेलो के एक उद्धरण से की— “प्यार कोई दीवार नहीं देखता, वह हर बाधा पार कर अपने लक्ष्य तक पहुंचता है।”
शादी सजा से पहले तय हो चुकी थी
कैदी को साजिश और हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया गया था। उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। परिवार ने कोर्ट को बताया कि शादी की योजना सजा से पहले ही बन चुकी थी। कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि कैदी को तय समय पर रिहा किया जाए और वह 26 जुलाई 2025 को शाम 4 बजे तक वापस जेल लौटे। कोर्ट ने कहा, “उस लड़की को खुश रहने दीजिए, यह कोर्ट उसे ढेरों आशीर्वाद देता है।

