MLC in forgery case: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को MLC अक्षय प्रताप सिंह और अन्य आरोपियों को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है।
यह मामला पूर्व कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह द्वारा लगाए गए धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोपों से जुड़ा है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए विशेष MP-MLA अदालत, लखनऊ’ के आदेश को बरकरार रखा और मामले की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि: क्या हैं आरोप?
- शिकायतकर्ता: राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह।
- आरोपी: MLC अक्षय प्रताप सिंह, रोहित कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह और रामदेव यादव।
- मुख्य आरोप: भानवी सिंह का आरोप है कि आरोपियों ने उनकी फर्म, M/s सारंग एंटरप्राइजेज की मूल्यवान संपत्तियों को हड़पने के लिए एक साजिश रची।
- जालसाजी: शिकायत के अनुसार, फर्म की संपत्तियों को अवैध रूप से कहीं और स्थानांतरित करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उनमें हेरफेर की गई।
अदालत की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने याचिका में कोई मेरिट न पाते हुए इसे खारिज कर दिया। अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए माना कि विशेष अदालत (MP-MLA Court) का निर्णय सही था और इसमें दखल देने की कोई आवश्यकता नहीं है। अब निचली अदालत में इस मामले की सुनवाई सुचारू रूप से चलेगी।
निष्कर्ष
अक्षय प्रताप सिंह को राजा भैया का बेहद करीबी माना जाता रहा है, ऐसे में पारिवारिक फर्म से जुड़े इस विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में काफी चर्चा बटोरी है। हाई कोर्ट के इस रुख के बाद अब आरोपियों को निचली अदालत में ही अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी।
कानूनी घटनाक्रम
- 19 अक्टूबर, 2023: न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने भानवी सिंह की अर्जी पर FIR का आदेश देने के बजाय इसे ‘शिकायत मामले’ (Complaint Case) के रूप में दर्ज किया।
- 18 फरवरी, 2024: विशेष MP-MLA अदालत ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया और मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया।
- 24 मार्च, 2026: हाई कोर्ट ने MLC अक्षय प्रताप सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।

