Sunday, June 28, 2026
HomeSupreme CourtCaste Status: हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा अन्य धर्म अपनाने...

Caste Status: हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा अन्य धर्म अपनाने पर खत्म हो जाएगा SC दर्जा, इस ऐतिहासिक फैसले को पढ़ें

Caste Status: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, उसे अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि धर्मांतरण के साथ ही व्यक्ति का SC दर्जा तुरंत और पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा कानूनी संदेश है जो धर्मांतरण के बाद भी अपने मूल जाति प्रमाण पत्र का उपयोग कर आरक्षण या कानूनी सुरक्षा (जैसे SC/ST एक्ट) का लाभ उठाना चाहते हैं।

अदालत की मुख्य कानूनी टिप्पणी: यह पाबंदी पूर्ण है

  • सुप्रीम कोर्ट ने ‘संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950’ की व्याख्या की।
  • कोई अपवाद नहीं: “अनुच्छेद 3 के संचालन द्वारा जो व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना गया है, वह किसी भी वैधानिक लाभ, आरक्षण या सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता। यह पाबंदी पूर्ण (Absolute) है और इसमें कोई अपवाद नहीं है।”
  • दोहरा दावा असंभव: “एक व्यक्ति एक साथ उस धर्म (ईसाई/इस्लाम आदि) का पालन नहीं कर सकता जो अनुच्छेद 3 में निर्दिष्ट नहीं है और साथ ही अनुसूचित जाति की सदस्यता का दावा भी नहीं कर सकता।”

मामले की पृष्ठभूमि: पादरी की याचिका खारिज

  • यह मामला आंध्र प्रदेश के एक पादरी चिंताडा आनंद से जुड़ा था।
  • शिकायत: आनंद ने 2021 में एक व्यक्ति के खिलाफ मारपीट और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि प्रार्थना के दौरान उन पर हमला किया गया और जातिसूचक गालियां दी गईं।
  • हाई कोर्ट का रुख: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 2025 में मामले को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि चूंकि आनंद ईसाई धर्म अपना चुके हैं और पादरी के रूप में काम कर रहे हैं, इसलिए वे SC दर्जे का लाभ नहीं ले सकते।
  • सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष: शीर्ष अदालत ने नोट किया कि याचिकाकर्ता पिछले एक दशक से पादरी के रूप में काम कर रहा था और उसने वापस अपने मूल धर्म (हिंदू धर्म की मडिगा जाति) में लौटने का कोई प्रमाण नहीं दिया।

ईसाई धर्म और जाति व्यवस्था

अदालत ने हाई कोर्ट के उस तर्क को भी सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि जाति व्यवस्था ईसाई धर्म का हिस्सा नहीं है। इसलिए, ईसाई धर्म अपनाने वाला व्यक्ति SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने का अधिकार खो देता है। घटना के समय याचिकाकर्ता ईसाई धर्म का पालन कर रहा था, इसलिए वह कानून की नजर में ‘अनुसूचित जाति’ का व्यक्ति नहीं था।

क्या कहता है कानून? (संविधान आदेश, 1950)

संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत जारी 1950 के आदेश के अनुसार, केवल हिंदू धर्म को मानने वाले ही अनुसूचित जाति के पात्र थे। बाद में इसमें संशोधन कर सिख (1956) और बौद्ध (1990) धर्म को भी शामिल किया गया। इनके अलावा किसी भी अन्य धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) में धर्मांतरण करने पर आरक्षण और अन्य कानूनी सुरक्षा के लाभ स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
scattered clouds
37.1 ° C
37.1 °
37.1 °
34 %
2.6kmh
38 %
Sat
38 °
Sun
42 °
Mon
43 °
Tue
37 °
Wed
30 °

Recent Comments