Mobile Tower Row: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मोबाइल टावर इंस्टॉलेशन (Mobile Tower Installation) के एक मामले में समानता और जनहित को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन बंसल ने सरल मोबाइल प्रोजेक्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए फरीदाबाद के डिप्टी कमिश्नर (DC) द्वारा टावर की अनुमति रद्द करने के आदेश को सेट-साइड (Set aside) कर दिया। कोर्ट ने फरीदाबाद के एक विशेष इलाके के निवासियों के विरोध को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि एक मोहल्ले के लोग पूरे राज्य के अन्य निवासियों की तुलना में “बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा” का विशेष दावा नहीं कर सकते।
मामला क्या था? (Permission vs. Protest)
- अनुमति: जनवरी 2025 में, फरीदाबाद के DC ने हरियाणा सरकार की 2023 की इन्फ्रास्ट्रक्चर पॉलिसी के तहत ‘हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण’ (HSVP) की जमीन पर टावर लगाने की मंजूरी दी थी।
- विरोध: स्थानीय निवासियों ने स्वास्थ्य संबंधी खतरों (विशेषकर बुजुर्गों के लिए) का हवाला देते हुए विरोध शुरू कर दिया।
- कैंसिलेशन: अप्रैल 2025 में, DC ने “जनहित” और “स्थानीय विरोध” का हवाला देते हुए पहले दी गई अनुमति को रद्द कर दिया।
कोर्ट का कड़ा रुख: “भेदभावपूर्ण रवैया बर्दाश्त नहीं”
- हाई कोर्ट ने अनुमति रद्द करने के आधार को ‘आधारहीन’ बताते हुए कई कड़े सवाल उठाए।
- समानता का सिद्धांत: किसी विशेष इलाके के निवासियों के स्वास्थ्य की रक्षा की आवश्यकता पूरे राज्य से अलग नहीं है। सभी निवासी समान हैं, चाहे वे किसी विशेष शहर के सेक्टर में रहते हों या कहीं और।
- प्रभाव में फैसला: कोर्ट ने पाया कि संबंधित अथॉरिटी ने इलाके के कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में या किसी अन्य स्वार्थ (Ulterior Motive) के चलते अनुमति रद्द करने का प्रस्ताव दिया।
- पार्क और टावर: कोर्ट ने नोट किया कि पूरे राज्य में नगर निगम के पार्कों और रिहायशी इलाकों में मोबाइल टावर लगे हुए हैं। ऐसे में केवल एक जगह पर इसे रोकना तर्कहीन है।
डिप्टी कमिश्नर की शक्तियों की सीमा
- अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुमति रद्द करना DC के अधिकार क्षेत्र में नहीं था।
- रीलोकेशन (Relocation): यदि संपत्ति के मालिक (HSVP) को कोई समस्या थी, तो वह टावर को स्थानांतरित करने या बदलाव का अनुरोध कर सकता था, लेकिन सीधे अनुमति रद्द करने की मांग नहीं।
- कानूनी प्रक्रिया: याचिकाकर्ता ने मौजूदा पॉलिसी के तहत ही मंजूरी ली थी। एक बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद, उसे बिना किसी ठोस कानूनी आधार के वापस नहीं लिया जा सकता।
स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर स्पष्टता
वकील सुमीत जैन ने तर्क दिया कि टावर अभी लगा भी नहीं था कि विरोध शुरू हो गया। कोर्ट ने संकेत दिया कि मोबाइल टावरों से होने वाले ‘स्वास्थ्य खतरों’ के दावे अक्सर वैज्ञानिक आधार के बजाय धारणाओं पर आधारित होते हैं, और इन्हें केवल एक विशिष्ट क्षेत्र के लिए अलग नियमों के रूप में लागू नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष: विकास और विरोध के बीच संतुलन
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का यह फैसला उन टेलीकॉम कंपनियों के लिए बड़ी राहत है जो अक्सर स्थानीय विरोध के कारण नेटवर्क विस्तार नहीं कर पातीं। यह फैसला याद दिलाता है कि ‘जनहित’ का अर्थ पूरे समाज का हित है, न कि किसी एक मोहल्ले की विशेष पसंद या नापसंद।

