National Chambal Sanctuary: नेशनल चंबल सेंचुरी (National Chambal Sanctuary) में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रेत खनन (Illegal Sand Mining) पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि संरक्षित क्षेत्रों में जलीय जीवों के आवास (Habitat) को नष्ट करना अपराध है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को भी “Vicariously Liable” (अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार) माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जिन इलाकों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पिछले साल घड़ियाल छोड़े थे, वहां भी अब अवैध खनन शुरू हो गया है।
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश
- अधिकारियों पर गाज: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के संबंधित विभागों के अधिकारी अपनी सुस्ती और निष्क्रियता के कारण इस तबाही में ‘मददगार’ माने जाएंगे। उन पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।
- कानूनी शिकंजा: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चंबल जैसे संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीव आवास का विनाश करना कई कानूनों के तहत अपराध है, जिनमें वाइल्ड लाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट (Wild Life Protection Act), एनवायरनमेंट (प्रोटेक्शन) एक्ट, फॉरेस्ट (कंजर्वेशन) एक्ट, बायोलॉजिकल डायवर्सिटी एक्ट और इंडियन फॉरेस्ट एक्ट शामिल हैं।
- Suo Motu संज्ञान: कोर्ट ने इस मामले पर खुद (Suo Motu) संज्ञान लिया है। मामला न्यूज़ रिपोर्ट्स पर आधारित है जिसमें बताया गया है कि कैसे खनन की वजह से ‘घड़ियालों’ और अन्य जीवों के घर उजाड़े जा रहे हैं।
क्यों खास है चंबल सेंचुरी?
- यह सेंचुरी करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैली है और तीन राज्यों (MP, UP, राजस्थान) के संगम पर स्थित है। यह मुख्य रूप से इन दुर्लभ जीवों का घर है।
- घड़ियाल (Gharial): लंबे थूथन वाला मगरमच्छ (Endangered)।
- गंगा डॉल्फिन (Ganges River Dolphin): भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव।
- रेड-क्राउंड रूफ टर्टल (Red-crowned roof turtle): दुर्लभ कछुआ।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने इस मामले में दो वकीलों को Amici Curiae (अदालत के सहायक) नियुक्त किया है।

