NHAI-TOLLS: केरल हाईकोर्ट ने कहा कि अगर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) या उसके एजेंट हाईवे पर सुरक्षित, सुगम और नियंत्रित रास्ता देने में नाकाम रहते हैं, तो वे जनता से टोल नहीं वसूल सकते।
टोल वसूली को चार हफ्तों के लिए सस्पेंड कर दिया
कोर्ट ने यह फैसला एनएच 544 के एदापल्ली से मन्नूथी तक के हिस्से पर टोल वसूली को चार हफ्तों के लिए सस्पेंड करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार इस मामले में जनता की शिकायतों का समाधान नहीं करती, तब तक टोल वसूली पर रोक जारी रहेगी। यह अंतरिम आदेश उन याचिकाओं पर दिया गया, जिनमें कहा गया था कि इस हाईवे पर अंडरपास, फ्लाईओवर और ड्रेनेज निर्माण के चलते भारी ट्रैफिक जाम है और सर्विस रोड की हालत भी खराब है। ऐसे में टोल वसूलना गलत है।
जनता से टोल वसूली तभी जब रास्ता बाधा रहित हो
कोर्ट ने कहा कि जनता टोल देने के लिए बाध्य है, लेकिन एनएचएआई की जिम्मेदारी है कि वह बिना किसी रुकावट के ट्रैफिक की सुविधा दे। अगर एनएचएआई या उसके ठेकेदार ऐसा नहीं करते, तो टोल वसूलने का अधिकार नहीं बनता। यह जनता और एनएचएआई के बीच सार्वजनिक विश्वास का मामला है। अगर यह विश्वास टूटता है, तो कानून के तहत टोल वसूली का अधिकार भी खत्म हो जाता है।
राज्य की जिम्मेदारी है कि जनता का हित सर्वोपरि रहे
कोर्ट ने कहा कि हर सार्वजनिक परियोजना के साथ राज्य की यह जिम्मेदारी होती है कि वह जनता के हित को प्राथमिकता दे। राज्य और निजी कंपनियों के बीच हुए अनुबंध इस जिम्मेदारी से राज्य को मुक्त नहीं कर सकते।
सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर टोल नहीं वसूला जा सकता
एनएचएआई ने कोर्ट में कहा कि टोल वसूली एक कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है और इसे रोकने से नुकसान होगा। लेकिन कोर्ट ने यह तर्क खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर जनता को सड़क के इस्तेमाल का पूरा लाभ नहीं मिल रहा, तो सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर टोल नहीं वसूला जा सकता।
केंद्र सरकार को तय करना होगा अगला कदम
कोर्ट ने कहा कि टोल वसूली का अधिकार सिर्फ कानून के तहत है, न कि किसी निजी समझौते के आधार पर। जब तक जनता को बिना रुकावट सड़क इस्तेमाल करने की सुविधा नहीं मिलती, तब तक टोल वसूली का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एनएचएआई ने जनता की शिकायतों को नजरअंदाज किया है और फरवरी 2025 से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
टोल की दरें तय करना केंद्र का काम
कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह एनएचएआई, राज्य के मुख्य सचिव और ठेकेदार के साथ मिलकर इस मामले में जरूरी कदम उठाए। जब तक यह नहीं होता, टोल वसूली पर रोक जारी रहेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि टोल की दरें तय करने और वसूली पर फैसला लेने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है। ऐसे में यह तय करना केंद्र का काम है कि टोल में कटौती की जाए या पूरी तरह से रोका जाए।

